विषपायी !

विषपायी !

विष पी-पी कर कोई विषपायी
उगलेगा कब तक अमृत ही!
बीतेंगे युग चुक जायेगा•••
विष कभी तो बाहर आयेगा!
– सत्यार्चन

लेखक: सत्यार्चन.SathyaArchan

हिन्द-हिन्दी-हिन्दू-हित-हेतु..... वास्तविक हिन्द हितचिंतक मंच!. प्रयास और परिवर्तन के प्रबल पक्षधर पराजित नहीं होते... हो भी नहीं सकते !!! - #सत्यार्चन #SathyArchan #Satyarchan

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