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सत्य मेव जयते! -1

सत्य मेव जयते! -1

जीवन यात्रा में, नैतिकता की परिधि के भीतर का, हर मनोरम दॄश्य, उचित व  रमणीय है, किस दॄश्य पर कितना रमना है यही, विराम को, उचित और अनुचित बनाता है!

 संतुलित है तो सब उचित और असंतुलित है तो कुछ भी उचित नहीं ! 

सबसे महत्वपूर्ण संतुलन या सामजस्य ही है!
गुरुओं से मिलना तो दरिया-सागर सा मिलना••• 

 इस तरह घुल जाना कि गुरु होकर ही ठहरना! 
-SathyaArchan 

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