सत्य सत सा सबल –

– सत्य सत सा सबल –

*आक्षेपित सत्य कटु तो चयनित मृदु!*
*अनापेक्षित सत्य वीभत्स तो सापेक्ष मनोहर!*
*आमुख सत्य पीड़क तो सहचर आनंदकर!*
*आरोपित सत्य शूल तो उद्भवित मूल!*
*सत्य, सत सा सबल, सत अटल निर्मल, अविचल*
*स्वीकार्य सत्य तो सम्बल अस्वीकार्य सत करे विकल!*

-सुबुद्ध सत्यार्चन

Advertisements

लेखक: सत्यार्चन.SathyaArchan

हिन्द-हिन्दी-हिन्दू-हित-हेतु..... वास्तविक हिन्द हितचिंतक मंच!. प्रयास और परिवर्तन के प्रबल पक्षधर पराजित नहीं होते... हो भी नहीं सकते !!! - #सत्यार्चन #SathyArchan #Satyarchan

“सत्य सत सा सबल –” पर 2 विचार

  1. mann – अनकहे एहसासों से शब्दों में ढलते जज्बातों की कहानी......या यु कहूँ की वो बातें जो होठो तक आकर ही रुक सी जाती है.....उन बातों की किताब है...... yeh_jindagi
    mann कहते हैं:

    1. सुबुद्ध.SathyaArchan – भारत – प्रयास और परिवर्तन के प्रबल पक्षधर पराजित नहीं होते...हो भी नहीं सकते !!! -हिन्द- हिन्दू - हिन्दी का वास्तविक हितचिंतक मंच!- #सत्यार्चन #SathyArchan #Satyarchan
      सत्यार्चन.SathyaArchan कहते हैं:

      आभार!
      आज का निवेदन

      71वें गणतंत्र दिवस पर राष्ट्र से एक छोटा सा निवेदन- ( लिंक पर)

      स्वर्णिम भारत https://lekhanhindustani.com/%e0%a4%b8%e0%a5%8d%e0%a4%b5%e0%a4%b0%e0%a5%8d%e0%a4%a3%e0%a4%bf%e0%a4%ae-%e0%a4%ad%e0%a4%be%e0%a4%b0%e0%a4%a4/

आपके आगमन का स्वागत है... जाने से पहले अच्छा-बुरा... कुछ तो कहिये...!!!