सत्य सत सा सबल –

– सत्य सत सा सबल –

*आक्षेपित सत्य कटु तो चयनित मृदु!*
*अनापेक्षित सत्य वीभत्स तो सापेक्ष मनोहर!*
*आमुख सत्य पीड़क तो सहचर आनंदकर!*
*आरोपित सत्य शूल तो उद्भवित मूल!*
*सत्य, सत सा सबल, सत अटल निर्मल, अविचल*
*स्वीकार्य सत्य तो सम्बल अस्वीकार्य सत करे विकल!*

-सुबुद्ध सत्यार्चन

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लेखक: सत्यार्चन.SathyaArchan

हिन्द-हिन्दी-हिन्दू-हित-हेतु..... वास्तविक हिन्द हितचिंतक मंच!. प्रयास और परिवर्तन के प्रबल पक्षधर पराजित नहीं होते... हो भी नहीं सकते !!! - #सत्यार्चन #SathyArchan #Satyarchan