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अनुभव 

अनुभव 

            सामान्यतः बड़े बूढ़े अपने जीवन भर में देखे सुख-दुख  के अनुभव के आधार पर, बूढ़े होने तक, अच्छे-बुरे, सही-गलत को ठीक-ठीक  समझ पाते हैं! अपने जीवन भर का यही हासिल वे उन सबसे साझा करना चाहते हैं जिनकी आयु उनसे कम है! इस उद्देश्य के साथ कि उनके युवा,  जीवन के  बहुत सारे वर्ष व्यर्थ करने के स्थान पर उनके कनिष्ठ अल्प आयु में ही, उनके प्राप्त  अनुभव के लाभ जान सकें / ले सकें!  

              जिन्दगी में अनुभव का कोई विकल्प नहीं होता और अनुभव बीते दिन के बीतते ही उसे विगत बनाने से आता है!
              विगत से मिली सीख को याद रखने, गाँठ बाँध लेने में और असंगत को नकारकर बिसारने में ही हित है!

          कहा गया है कि- 


“बुद्धिमान वह है जो दूसरों के अनुभव से सीखता है!”


“समझदार अपने अनुभव से 
सीखता है!”  (अपनी गलतियों/  भूलों को समझकर स्वीकार कर) 


“नासमझ अपने अनुभव में से ना तो अपनी भूलों को समझ पाता है ना ही किसी अन्य के इंगित किये जाने पर स्वीकार ही पाता है तो सीखने का तो प्रश्न ही नहीं उठता!”

 

             समझदार व्यक्ति पिछले दिन के स्वयं से, आज के स्वयं को, उत्तम मानने/ बनाने/ गढ़ने हेतु प्रयत्नशील रहता है! 

            नासमझ विगत के स्वयं को आज के स्वयं से उत्तम मानने/  बताने/ जताने में आज और आने वाले कल दोनों का सर्वनाश कर रहा होता है! 

           बीते कल व आने वाले कल में आज के स्वयं का 10% से अधिक  वैचारिक व्यय करने वाला, जीवन में बड़ी सफलताओं से दूर ही रहता है! 

जीवन में सफलता पाने के लिए व्यावसायिक दृष्टिकोण अपनाना ही हितकर होता है! (“Success Needs a Professional Approach”) क्या और क्यों कारगर  होती है यह प्रोफेशनल अप्रोच? प्रोफेशनल अप्रोच यानी किसी कार्य/ समस्या का, मुख्य रूप से लाभ-हानि को दृष्टिगत रख, समापन सुनिश्चित करना! अधिकांश पाठक कहीं ना कहीं कार्यरत हैं ही!  निजी जीवन की कार्रवाइयों को समरूप व्यावसायिक परिदृश्य में रखकर योजना बनानेे और उसपर योजनानुसार क्रियान्वयन करनेे की आदत बना लेें तो समय का सर्वोत्तम प्रयोग सफलता की सीढ़ियों को सहज बना देगा!

चलिये अनुभव से लाभ लेने की ओर चलें! 

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