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सुख चाहिये? ये लीजिये- 6 (जीवन में सुख के रंग)

सुख चाहिये? ये लीजिये- 6 (जीवन में सुख के रंग)

सभी रंगों की अपनी-अपनी महत्ता है
यही महत्ता याद दिलाने प्रतिवर्ष
होलिकोत्सव आता है!
💓
जानवरों के जीवन में तो दो ही रंग होते हैं,
श्वेत व श्याम
किंतु
मानव जीवन अनेक  शुभ-अशुभ रंगों से मिलकर ही सजता है!
शुभ रंगों की समग्र, सम्पूर्ण चाह हर एक को है…
किंतु जैसे अंधेरे का अस्तित्व ना होता तो प्रकाश को समझना कठिन होता 
वैसे ही अशुभ रंग ना होते तो शुभ रंगों का होना फीका ही होता…
तब रंगों में सुख ही ना होता ….
अशुभ से ही शुभ की महत्ता का महिमामंडन संभव है….
.
थोड़ी देर के लिये आप अपने लिये अशुभ और अप्रिय रंगों को
मन ही मन दुनियाँ भर से अदृश्य मानें
फिर बचे हुए रंगों को याद करें …
बचे हुए रंगों में से फिर से प्रिय और अप्रिय रंग अलग करने की क्रिया मन ही मन दोहरायें
3-4 बार दोहराने के बाद आपके पास 1 या 2 या 3 रंग ही बचेंगे….
फिर से विचारिये कि केवल आपके ये प्रियतम रंग ही दुनियां में बचे रह जायें तो ….?
दुनियां कैसी होगी ?
सोचिये ?
1 ही रंग बचा हो तो …
वैसी ही धरती वैसा ही आकाश …
वैसे ही पेड़ पौधे …
वैसे ही आप … वैसे ही आपके निकटजन…
वैसे ही मानव… वैसे ही दानव….
2 रंग ही प्रिय बचे तो...
वही पशुओं सी श्वेत श्याम वाली नीरस स्थिति …
इस तरह तो 3 से भी काम नहीं चलेगा ना ….
फिर तो जो भी जैसे भी रंग हैं ….
सभी जरूरी हैं ना ?
दूसरे रंग ना होंगे तो किसके सापेक्ष प्रिय / शुभ रंग खोजेंगे?
एक बात तो तय है कि सुख, शुभ में ही है ….
और सुख दूसरे की तुलना में अधिक प्रिय / शुभ / आरामदायक में है
तो क्या सुख सापेक्ष ना हुआ?
सामान्यत: सापेक्षता में ही सुख खोजा जा रहा है…
और
अन्य की परिस्थिति का विचार किये बिना
उसकी सापेक्षता में सुख खोजना ही
दुख का सबसे बड़ा कारण है…!
किंतु सापेक्षता के अतिरिक्त सुख का और कोई माप तो शायद हो भी नहीं सकता …
सापेक्षता का पैमाना अनुचित नहीं
किंतु…
अन्य के सापेक्ष नहीं ….
स्वयं के सापेक्ष देखें
और
सुखी हो जायें!
ईश्वर करे सभी पढ़ने वाले
समस्त शुभ रंगों से
आजीवन  सराबोर रहें !
शुभकामनाएँ!*
💓
फाल्गुन कष्ण प्रथमा सम्वत 2074
(2-3-2018)
*सुबुद्ध*
*Broadcast*
*-*
🎱*SathyaArchan
*सत्यार्चन 🎱
*A GLOBAL Name*
🔻💓🔻
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