सुहाग चिह्न, पूजा,व्रत कितने व्यर्थ ?

सुहाग चिह्न, पूजा,व्रत कितने व्यर्थ ?

क्या आज के युग में भी सुहाग जैसा विषय विचारणीय है या होना चाहिए?

पढ़िए इसी विषय पर किरण सिंह जी की मनोरम व उत्कृष्ट कहानी में… लिंक –

https://kiransingh.blog/2019/08/29/%e0%a4%b8%e0%a5%81%e0%a4%b9%e0%a4%be%e0%a4%97-%e0%a4%9a%e0%a4%bf%e0%a4%a8%e0%a5%8d%e0%a4%b9%e0%a5%8b%e0%a4%82-%e0%a4%95%e0%a4%be-%e0%a4%9a%e0%a4%ae%e0%a4%a4%e0%a5%8d%e0%a4%95%e0%a4%be%e0%a4%b0/

लेखक: सत्यार्चन.SathyaArchan

हिन्द-हिन्दी-हिन्दू-हित-हेतु..... वास्तविक हिन्द हितचिंतक मंच!. प्रयास और परिवर्तन के प्रबल पक्षधर पराजित नहीं होते... हो भी नहीं सकते !!! - #सत्यार्चन #SathyArchan #Satyarchan

“सुहाग चिह्न, पूजा,व्रत कितने व्यर्थ ?” पर एक विचार

  1. हृदय को छू लेनेवाली रचना समाज को आईना दिखाती हुई। धन्यवाद साझा करने के लिए।

    वो पल जब एक तरफ पूर्व की यादें और दूसरी तरफ आगे की जिंदगी के बीच प्रेम अगर दिल में हो तो गीले शिकवे आँसू बन छलक पड़ते हैं और फिर वही होता है जो हुआ।
    हम जिद्द वहीं करते हैं जहां पूरे होने का भरोसा होता है।
    हम रूठते भी उसी से हैं जिससे प्रेम बहुत ज्यादा होता है।
    जिस दिन हम इन बातों को समझ लेंगे कभी तलाक की नौबत नहीं आएगी।

    शादी-ब्याह कोई बाजार का सामान नही जिसे जब चाहा खरीद लिया जब चाहा तोड़कर फेंक दिया।

अच्छा-बुरा... कुछ तो कहिये...