हम-तुम… मैं!

हम-तुम… मैं!

आप और मैं
हम और तुम
जाने कब
हम-तुम
तुम-हम हो गये…
फिर मैं-तू, तू-मैं…
तू-तू-मैं-मैं के बाद
तुम-हम ना हो सके…
और ना हम-तुम!
फिर से
आप और हम हो गए…!
दुनियां गोल है
हम समझ गये…
चलते रहकर…
चलते चलते…
वहीं पहुंच कर
जहां से चले थे कभी
हम-तुम… तुम-हम!
-सत्यार्चन

लेखक: सत्यार्चन.SathyaArchan

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