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हम सब गुरु हैं!

हम सब गुरु हैं! 

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हम सब,  सबको सिखाते हैं••• सब से सीखकर••• तो हम सब ही गुरु हैं!

अच्छे गुरु!

*अच्छा गुरु तो वही हो सकता है जिसमें अनंत अतृप्त प्यास हो!*

*ज्ञान की प्यास!*

मेरी प्यास ही मुझे हर पल  सीखने के अवसर उपलब्ध कराती रहती है•••
बिना यह देखे कि सम्मुख कौन है!

कोई छोटा या बड़ा/  अपना या पराया/ शिक्षित या अशिक्षित/  अनाड़ी या धुरंधर•••  आमुख कौन है यह विचारणीय नहीं! विचारणीय मात्र यह कि नवाचार क्या है!

जिसकी जड़ें मुझमें बहुत पहले से बहुत गहरी जमीं हैं उस पौधे के बीजों को में क्यों सहेजूं?

किन्तु जो मदमाती गंध नथुनों को सुवासित कर मुझे आनंद की अनुभूति से भर रही हो परदेश में में भले उसे खरपतवार समझा जाता हो••• पर मुझे आनंद कर हो फिर भी स्वीकार्य  ना हो, तो मैं तो अपना ही दोषी  हो जाऊंगा?

*इसीलिए में विद्यार्थी हूँ! अध्ययनरत हूँ!  रहूँगा भी••• मरते दम तक•••*

*जब दम निकल रहा होगा तब ठीक से मरना सीखने की इच्छा है••• कदाचित सीख पाऊँ!*
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-सुबुद्ध सत्यार्चन 

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