हिन्दुओं की पूजा में बलपूर्वक व्यवधान! 

हिन्दुओं की पूजा में बलपूर्वक व्यवधान!

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यदि आप अतिविशिष्ट जन (व्ही आई पी /व्ही व्ही आई पी) नहीं हैं और ना ही मंदिरों/ मठों में घूस देकर,  भ्रष्टाचार प्रसार का पाप करना चाहते हैं  फिर भी किसी सुप्रसिद्ध तीर्थ  स्थित किसी सिद्ध मूरत के दर्शनाभिलाषी हैं या किसी पर्व पर किसी सिद्ध  पूजास्थल में जाकर पूजन की अभिलाषा पाल बैठे हैं तो आपकी अभिलाषा कतई उचित नहीं!

*पर्वों और प्रतिष्ठित तीर्थों के दर्शनाभिलाषियों की दुर्दशा का प्रत्यक्षदर्शी होने का दुर्भाग्य  हमने जीवन में कई कई बार भोगा है!*

*हम सवयं भी भुक्तभोगी हैं!*

ऐसी अभिलाषा  लिये शायद कभी आप भी पहुँचे हों  किसी तीर्थ पर तो बताइये, मैं सही हूँ या नहीं?
जिन पूजाघरों का प्रबंधन उनके अपने निज ट्रस्ट के अधीन ना होकर शासनाधीन है उनमें-   *“जिस महिमामयी मूरत की दर्शनाभिलाषा के लिये श्रद्धालु कई महीनों तक योजना बनाता है, बचत करता है, कुछ दिनों की यात्रा कर उस स्थान तक पहुंचता है, तब कई घंटों की पंक्तिबद्ध रहकर इतनी प्रतीक्षा के उपरांत श्रद्धालु उस मूरत के सम्मुख पहुँचता ही है कि उसका सामना सुरक्षा बलों के आदेशों व धक्कों से होता है!  अनेक श्रद्धालुओं को तो क्षणिक दर्शन लाभ लेने से भी पहले ही या हाथ जोड़ प्रणाम करने से पहले ही, धक्के मारकर बाहर निकाल दिया जाता  है!*

वही शासन / प्रबंधन इसे ही व्यवस्था बताता है! जो अल्पसंख्यकों की प्रार्थना/ पूजा / उत्सव को निर्विघ्न सम्पन्न कराने शहरों की यातायात व्यवस्था तक अवरुद्ध करने में नहीं हिचकता वही बहुसंख्यकों की चंद सेकेंड्स की प्रार्थना में बलपूर्वक व्यवधान डालता है!!!

*क्या यह उचित है?*
!
-सुबुद्ध सत्यार्चन

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लेखक: सत्यार्चन.SathyaArchan

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