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हे भारत! जागिये!



 हे भारत! जागिये!

आइये भारत! 

राष्ट्र की वास्तविक स्वतंत्रता के संग्राम में सम्मिलित होकर अपने आपको जिताइये! 

‘SathyaArchan/  सत्यार्चन/ सत्य अर्चन’ नाम,  किसी भी सर्च एंजिन पर खोज लीजिए हमारे राष्ट्र हित को समर्पित प्रयासों का इतिहास प्रमाणित हो जायेगा! 

हमारे बहुत सारे ग्रुप्स व पेजेज फेसबुक आदि स्वतंत्र मीडिया पर  हैं जो कहे गये उद्देश्य को ही समर्पित हैं! 


“जब हम लुटेरे / बलात्कारियों / जघन्य अपराधियों को अपना मत देकर हमारे प्रतिनिधित्व का अधिकार देते हैं तो हम हमारे/ हमारे अपनों / हमारे परिचितों/ हमारे समाज के साथ वैसे ही जघण्य अपराध करने के लिए / होते रहने देने के लिए,  अधिकार पत्र सौंपकर असामाजिक तत्वों को आमंत्रित कर रहे होते हैं! अपराधियों /अपराधी पृष्ठभूमि वालों को चुनकर कौनसा जनहित होगा? इनके अतिरिक्त किसी भी अधिक योग्य को ही अपना मत दें! आप अपराधियों को वोट देकर चुनना बंद करेंगे; तो सभी राजनैतिक दल अपराधियों से दूरी बनाने मजबूर हो जायेंगे!”

आपके गांव /शहर /कस्बे / नगर के आपके मोहल्ले में का 1 ही गुण्डा सामाजिक सौहार्द स्थापित होने देने में शेष सबपर भारी पड़ता है वह अपने मुट्ठी भर साथियों के  साथ मिलकर आपके क्षेत्र में प्रशासन को अपनी जेब में रख कानून व्यवस्था को तहस नहस करते रहता  है! जब हजारों रहवासियों के बीच 1 गुण्डा ही इतनी बड़ी समस्या है तो लगभग 33% अपराधियों से युक्त संसद से आप कानून व्यवस्था बनाये रखने की आशा कर ही कैसे सकते हैं???



इतनी सी बात जिस दिन  जनसाधारण को समझ आ जायेगी देश सकारात्मक सामाजिक प्रगति की  दिशा में दौड़ना शुरू कर देगा! 

हमारा प्रयास 1989 से इसी उद्देश्य को समर्पित है! हम किसी राजनैतिक दल या विचारधारा के समर्थन या विरोध में नहीं! हम ‘भारत’ हैं और सकारात्मक प्रागत राष्ट्र होने का स्वप्न ही नहीं संजोये हैं  इसे साकार करने की दिशा में अपने सीमित साधनों के साथ निरंतर प्रयासरत हैं! 

आपको, आपके मित्रों को और सबको आमंत्रण है आइये स्वतंत्रता संग्राम के बलिदानियों को सच्ची श्रद्धांजलि स्वरूप उनके इस स्वप्न के साकार की दिशा में हमारे साथ आइये या हमसे बहुत आगे बढ़ चढ़कर इसे साकार करने के यज्ञ में यथासंभव आहूति दीजिए!
-सुबुद्ध सत्यार्चन 

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