महामूर्ख, मूर्ख और समझदार…

महामूर्ख, मूर्ख और समझदार…

मुख्यतः 3 तरह के लोग हैं दुनियाँ में, महामूर्ख, मूर्ख और समझदार!!!
वे जो देखकर, सुनकर या किसी अन्य से जानकर पहले वस्तुओं / लोगों  को अच्छे या बुरे में वर्गीकृत करते हैं … फिर अच्छों में केवल अच्छाइयां और शेष में केवल कमियाँ ही देखते हैं! वे महामूर्ख की उपाधि योग्य हैं!
दूसरे प्रकार के लोग नई वस्तुओं / लोगों / नवाचारों को डरते-डरते जैसे तैसे आजमाने तैयार होते हैं, पहले केवल खामियां देखते , गिनते, गिनाते हैं फिर नकार देते हैं, फिर कभी कहीं से पुनरानुरोध पर स्वीकार लें तो उसकी खामियाँ याट करने, स्वीकारने, और शेष पर विचार से ही इंकार करते हैं!!! ये मूर्ख कहवाने योग्य होते हैं!
तीसरे वे हैं जो उपलब्ध वस्तुओं / लोगों / नवाचारों को स्वीकार से पूर्व सभी के गुण-दोषों का तुलनात्मक अध्ययन करते / कराते हैं फिर परिवेशानुसार न्यूनतम दोष एवं अधिकतम उपयोगिता वालों का चुनाव करते हैं! वे जानते हैं कि संसार में दोषमुक्त कुछ नहीं है! न्यूनतम दोषयुक्त ही सर्वोत्तम है! और सर्वदा-सर्वोत्कृष्ट कुछ नहीं रह सकता… जो आज सर्वोत्तम / सर्वश्रेष्ठ स्थापित है कल या आज भी दूसरे परिवेष में उसका स्थान कुछ / कोई अन्य अधिक उपयेक्त होगा!!! ये ही समझदार कहलाने योग्य हैं!

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2 विचार “महामूर्ख, मूर्ख और समझदार…&rdquo पर;

अच्छा या बुरा जैसा लगा बतायें ... अच्छाई को प्रोत्साहन मिलेगा ... बुराई दूर की जा सकेगी...

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