आस तो आस है… 20160729_093222

आस नहीं होती निराश

पसलियों के पिंजरे में ….
धड़कता है जैसे दिल ….
पत्थरों के बीच खुश हैं हम ….
कभी तो पत्थरों पर भी…
हरियाली छा ही जायेगी …

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गुमनाम है कई ….

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अच्छा-बुरा... कुछ तो कहिये...