मेरा हृदय, घर है तुम्हारा

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मेरा हृदय, घर है तुम्हारा

 

 

मेरे हृदय का एक कक्ष …
आरक्षित रहा जो  तुम्हारे नाम…
ना भर सका तुम्हारे सानिध्य से ….
ना ही रिक्त तुम्हारी यादों से….,

 

तुम हो अब ‘स्थित वहाँ ‘

 

यहाँ मगर मेरे दिल में भी हो

और रहोगी भी सदा ….

तुम्हारी अमिट यादों  में….!!!

8 comments

अच्छा या बुरा जैसा लगा बतायें ... अच्छाई को प्रोत्साहन मिलेगा ... बुराई दूर की जा सकेगी...

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