विषपायी !

विषपायी !

विष पी-पी कर कोई विषपायी
उगलेगा कब तक अमृत ही!
बीतेंगे युग चुक जायेगा•••
विष कभी तो बाहर आयेगा!
– सत्यार्चन

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