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भारत लेखन हिन्दुस्तानी हिन्दी

आइये भारत को समृद्ध करें !!!

“किसी भी युद्ध में, पृथक-पृथक मोर्चों पर कुशलतम योद्धाओं को भी एक-एक कर लड़ने भेजने पर केवल वीरगति ही दिलाई जा सकती है…. विजयश्री का वरण नहीं किया जा सकता! विजय पाने कुशल / अकुशल योद्धाओं की टुकड़ी को, योजनाबद्ध तरीके से साथ मिलकर एक के बाद एक मोर्चे पर संगठित आक्रमण करना होता है”
विचार करें ….  आपको हमको सब हिन्दी जनों को सोचना है… तय हमें करना है कि हम अलग-अलग प्रयासों को मरते देखना चाहते हैं…,  जिसमें किसी को किसी लक्ष्य की प्राप्ति नहीं होनी है …., या एक दूसरे का हाथ पकड़ साथ चलकर,  हिन्दी को और हिन्दुस्तानी भाषाओं को सशक्त करने में योगदान करना है!….

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हिंदी रत्न Uncategorized

ज़िद है जिद

   जिद है जिद….. दोस्तो: हम हिन्दी हमारी संस्कृति के प्रति इतने कृतघ्न हो चुके हैं कि हम हमारे  संस्कारों के उपहास में स्वयं भी ना केवल सम्मिलित ही हैं वरन अपने ही उपहास पर अट्टहास किए जा रहे हैं!!!!!! . वे जो षणयंत्रकारियों के चंगुल में असहायता-वश जा फँसे हैं या अविवेक-वश उन्हें भी […]

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आइये ब्लाॅगर… स्वागत है आपका!

आइये ब्लाॅगर… स्वागत है आपका! पूर्व घोषणा अनुसार आपका अपना ब्लाॅग “लेखन हिन्दुस्तानी” बिजनेस ब्लाॅग में परिवर्तित होकर अब समूह ब्लाॅग हो गया है! “लेखन हिंदुस्तानी” को आप; अपनी रचनाओं से सुसज्जित, आपके निजी ब्लाॅग के नि:शुल्क विज्ञापन हेतु उपयोग कर सकते हैं! आपका स्वागत है- (1) आपकी सर्वोत्तम रचना के साथ आपकी ब्लाॅग लिंक्स […]

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वर्तमान आरक्षण व्यवस्था सरकारी मोटराइज्ड व्हीलचेयर है!

वर्तमान आरक्षण व्यवस्था में; चलने में कमजोर आरक्षितों को मोटराइज्ड व्हीलचेयर पर बिठाकर नैसर्गिक सक्षम लोगों के साथ चलाने, बढ़ाने, दौड़ाने जैसा मूर्खता पूर्ण व आभासी प्रयास किया जा रहा है!

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सुख चाहिये? ये लीजिये! – 8

बनावटी युग में जीते हुये हम बनावटी होते गये! सच तो यह है कि जिन छोटी छोटी चीजों में / बातों में हम खुश हो सकते हैं उनमें सम्मिलित होना ही हम ओछापन /स्तरहीनता मानने लगे ! अगर इसे समझना है तो यूँ करें कि अपने आसपास के लोगों के दिखावटीपन और शर्मसार होने के […]

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सुख चाहिये? ये लीजिये!-7- सत चिंतन…

सुख चाहिये? ये लीजिये!-7- सत चिंतन… ईश्वर को समझना है तो आत्मा को समझें … बिल्कुल राष्ट्र को समझने के लिये नागरिक को समझना की तरह … किसी भी राष्ट्र की इकाई उसके नागरिक हैं … इसीलिये मैं कहता हूँ “मैं भारत हूँ” किन्तु केवल मैं ही भारत नहीं हूँ वरन् मैं भी भारत हूँ […]

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सुख चाहिये? ये लीजिये- 6 (जीवन में सुख के रंग)

सुख चाहिये? ये लीजिये- 6 (जीवन में सुख के रंग) सभी रंगों की अपनी-अपनी महत्ता है यही महत्ता याद दिलाने प्रतिवर्ष होलिकोत्सव आता है! 💓 जानवरों के जीवन में तो दो ही रंग होते हैं, श्वेत व श्याम किंतु मानव जीवन अनेक  शुभ-अशुभ रंगों से मिलकर ही सजता है! शुभ रंगों की समग्र, सम्पूर्ण चाह हर एक को है… […]

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नजर •••

नजर ••• ये जो नजर है तेरी कहर है हम पर उठती है झुकती है••• तीर सी चुभती है••• मचलता है वर्षों दिल ••• सुलगता रहता है जिस्म!

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नियुक्त, नियुक्ति, नियोक्ता

नियुक्त, नियुक्ति, नियोक्ता नियुक्ति… #नियोक्ता_का_उपकार_नहीं #विवशता_है! और #नियुक्त_का_अधिकार_है_वेतन… • नियुक्त से प्राप्त #उत्पादकता के बराबर का #मूल्य_कोई_भी_नियोक्ता_नहीं_चुकाता… #ना_ही_चुका_सकता… • नियुक्त की उत्पादकता से नियोक्ता को हुई प्राप्तियों का #बहुत_छोटा_सा_अंश_ही_मानदेय_रूपी_वेतन होता है … • नियुक्त का कर्तव्य #नियोक्ता_का_हित_संरक्षण और नियोक्ता का #उचित_व_समय_पर_मानदेय / वेतन ! • कार्य के उपस्कर जुटाना, नियोक्ता का और उनके उपयोग से […]

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जाने मैं जानूं… कि तुम जानो…

सिर्फ लेन या सिर्फ देन ही, एक तरफा प्रेम है… या दोहन है… या शोषण है!

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तुम तौलकर तो देखो

तुम तौलकर तो देखो तुम भी मुस्करा देना ••• मुस्कान के बदले! फिक्सिंग ही सही कर लो••• मिले मान के बदले !! दिल झूठ नहीं कहता जरा पूछकर बताओ ••• बस इस बार सच ही कहना ईमान के बदले! कुव्बत से निकल-निकल कर मैं होता रहा हल़ाक तुम तौलकर तो देखो मेरी जान के बदले!

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