जिन्दगी जाने को है
हाथ छोड़कर—!
पहले ही तुम चल दिये—
साथ छोड़कर!
अच्छा हुआ!
गैर का इल्जाम
तुम पर रखा जाता
रुखसत होती रूह से
कैसे सहा जाता !
#सत्यार्चन (#फेबु 12032017)

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लेखक: सत्यार्चन.SathyaArchan

हिन्द-हिन्दी-हिन्दू-हित-हेतु..... वास्तविक हिन्द हितचिंतक मंच!. प्रयास और परिवर्तन के प्रबल पक्षधर पराजित नहीं होते... हो भी नहीं सकते !!! - #सत्यार्चन #SathyArchan #Satyarchan