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लेखक: सत्यार्चन.SathyaArchan

हिन्द-हिन्दी-हिन्दू-हित-हेतु..... वास्तविक हिन्द हितचिंतक मंच!. प्रयास और परिवर्तन के प्रबल पक्षधर पराजित नहीं होते... हो भी नहीं सकते !!! - #सत्यार्चन #SathyArchan #Satyarchan
भारत लेखन हिन्दुस्तानी हिन्दी

दिल की सुन•••

दिल की सुन•••  नर्म सिरहाने पे सर , हाथ दिल पर रखकर,  सुन धड़कनों की सदा, बस झुठलाना छोड़ दे, तस्वीर दिल में बसी है, देख ले और चूम ले, आ तोड़ दायरे सारे, अब शरमाना छोड़ दे, ऐ दोस्त; जी ले कुछ पल, मर-मर कर जीना छोड़ दे, भरोसा कर अपने, मनवा की पुकार […]

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भारत लेखन हिन्दुस्तानी हिन्दी

हे भारत! जागिये!

 हे भारत! जागिये! आइये भारत! राष्ट्र की वास्तविक स्वतंत्रता के संग्राम में सम्मिलित होकर अपने आपको जिताइये! साथ
आइये या हमसे बहुत आगे बढ़ चढ़कर इसे साकार करने के यज्ञ में अपनी यथासंभव आहूति दीजिए!

-सुबुद्ध सत्यार्चन 

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आत्मावलोकन 

मुझे लगता है कि ज्यादातर लोग दूसरों के आंकलन, मूल्यांकन में ही जीवन गुजार देते हैं! अपने आपका और अपनों का मूल्यांकन करने की सोचते तक नहीं! केवल दूसरों में  निकाल दुःख का कारण खोजते रहते हैं और आजीवन दुखी रहते हैं! जबकि सुख का मार्ग ‘स्वमूल्यांकन-सेतु’ से होकर  ही जाता है!  चंद गिने चुने […]

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क्षणिकायें- 1

-प्रीत की रीत- रिता उसे!  और तू रीत! निभे रीत,  पनपे प्रीत! मीत मिले,  गीत बने!  सजे साज,   बजे संगीत! रीत जा  बीत जा मिट जा और  जीत जा! ठहरी यही  प्रीत की रीत!

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हिन्दुओं की पूजा में बलपूर्वक व्यवधान! 

हिन्दुओं की पूजा में बलपूर्वक व्यवधान!   यदि आप अतिविशिष्ट जन (व्ही आई पी /व्ही व्ही आई पी) नहीं हैं और ना ही मंदिरों/ मठों में घूस देकर,  भ्रष्टाचार प्रसार का पाप करना चाहते हैं  फिर भी किसी सुप्रसिद्ध तीर्थ  स्थित किसी सिद्ध मूरत के दर्शनाभिलाषी हैं या किसी पर्व पर किसी सिद्ध  पूजास्थल में जाकर […]

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हम सब गुरु हैं!

हम सब गुरु हैं!  🙏🏾🙏🏾🙏🏾 हम सब,  सबको सिखाते हैं••• सब से सीखकर••• तो हम सब ही गुरु हैं! अच्छे गुरु! *अच्छा गुरु तो वही हो सकता है जिसमें अनंत अतृप्त प्यास हो!* *ज्ञान की प्यास!* मेरी प्यास ही मुझे हर पल  सीखने के अवसर उपलब्ध कराती रहती है••• बिना यह देखे कि सम्मुख कौन […]

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शिल्प-वेदना!

 शिल्प-वेदना! पत्थरों से टकराना  ठहरा भाग्य   वो एक शिल्पकार  वर्षों हुए बनाते बुलाने लगे लोग   उसे जादूगर  बदसूरत बेडौल पत्थर उसका स्पर्श पाकर स्वरूप पाते सजीव  निर्जीव पत्थर जी जाते  मूक पाषाण  पाते स्वर  बोलते कुछ  पूछते शिल्पकार रहता मौन  झरझर अश्रु होते उत्तर  पत्थरों का उलाहना छीनने निश्तब्धता का कर डालने  का शांतिभंग   […]

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मधुरिमा 

मधुरिमा  आज के “दैनिक भास्कर” में सम्मिलित महिलाओं को समर्पित पत्रिका “मधुरिमा” भी है! मैंने देखी••• आप भी देखिए! आज की “मधुरिमा” मुख्य पृष्ठ क्र• 1 व 2 मिलाकर 11 रचनाकार हैं! छपे नामों के अनुमान अनुसार  इनमें 9 पुरुष व 2 महिला रचनाकार हैं! यह तब है  जब भास्कर समूह महिला रचनाकारों को प्रोत्साहित […]

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मेरी इकलौती गजल 

मेरी इकलौती गजल  ▶ तुझको नजर कर लिखना चाहूँ   क्या लिख पाऊं कोई गजल! सर से लेकर पैर तलक तू  खुद ही ठहरी  शोख गजल!◀ 🔽 तेरे गेसू गजल, तेरे नैन गजल, लब हैं गजल, रुखसार गजल! 🔼 🔽 तेरी तिरछी एक चितवन का  हो जाये जो,   दीदार गजल! 🔼 🔽 तेरा सीना गजल, […]

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