यादें तेरी…

तुमसे किया कोई वादा

 ना रह जाये अधूरा...
मिट जायें कि मिटा दें 
अपना हर हासिल 
निभाने किया गया अपना हर वादा... 
और तुझसे किये वादों की ही तरह 
सहेज रखी हैं...
हमने यादें तेरी...!-सत्यार्चन

मतकर मेरे दोस्त

मतकर मेरे दोस्त

कोशिश हँसने-हँसाने की,
मतकर मेरे दोस्त…
आज जरा भी जी नहीं…
मुफलिसी के दौर में

छलक गई…
जीभर पी नहीं…

समझौते!

समझ पाते तो समझौते….
ना यूं होते आते-जाते…!
गिले सिकवों से गले मिलते
गिनते ना कुछ गिनाते…!

ज़िन्दगी-LIVE 9 – खुश रहें, रखें और कुटुम्ब को सुखी बनाएं (भाग-1)

ज़िन्दगी-LIVE 9 – खुश रहें, रखें और कुटुम्ब को सुखी बनाएं (भाग-1)

अपने कुटुम्ब को सुखी कैसे बनाएं? स्वयं को, परिवार को खुश रखिए…

आप खुश तो परिवार खुश! परिवार खुश तो कुटुम्ब खुश और सब सुखी…,

सब सुखी हो जायें!

लागा दाग…

प्रतिपल विस्तार पाते विगत को   क्षणिक वर्तमान पर अप्रभावी बना कर ही सुंदर, सुखद, सुमंगल एवं अनंत भविष्य का निर्माण संभव है!

लागा दाग!

दाग लगने के बाद?

जीवन है जीवन में चलते-फिरते, उठते-बैठते …. जीवन के विभिन्न उपक्रम करते हुए… चोट लगते रहती है… शरीर पर, कार पर घर की दीवार पर , मान-सम्मान पर…

कार पर हो… दीवार पर हो या शरीर पर या मान-सम्मान पर ही हो… चोट/ डेंट/ दाग ना लगता तो बहुत अच्छा था… मगर लग गया… लगने के बाद….


लगने के बाद???


केवल भविष्य में ना लगने देने के प्रयास का निर्णय लेने के अतिरिक्त सब व्यर्थ!
जो होना था हो चुका !


अब?


प्रतिपल विस्तार पाते विगत को   क्षणिक वर्तमान पर अप्रभावी बना कर ही सुंदर, सुखद, सुमंगल एवं अनंत भविष्य का निर्माण संभव है!

-सुबुद्ध सत्यार्चन

फैसला – न्याय!

बधाई भारत !
बधाईयां समूचे हिन्दुस्तान को….!!
धन्यवाद्!!! सर्वोच्च न्यायालय के ऐसे निर्णय का जिससे सभी उत्सव मना सकें… अनेक जीवन समाप्त होने से/ मरणासन्न होने से बच सकें… ऐसे संतुलित निर्णय के लिए… धन्यवाद् सर्वोच्च न्यायालय!
न्याय यही था…हुआ!
आभार सर्वोच्च न्यायालय!

सुंदर सुखद साथ…


खूबसूरत सा वन…
सुंदर? जब सुखद मन…
सुखमन सच्चे साथ में पर
साथ सच्चा मिलना कठिन!
-सुबुद्ध सत्यार्चन

चलन

मिट्टी के तन में
सोने सा मन है!
आँसु के मोतियों से
क्यों सजाया बदन है?
दिखे सुहानी दूर से
यही दुनियाँ का चूलन है…
-सत्यार्चन