बताना मुझे आता नहीं…

… बताना मुझे आता नहीं …

मतकर दोस्त…

रहने दे आज

हँसने का,

जरा भी,

जी नहीं…

मुफलिसी का दौर है,

और छलक गई…

ठीक से पी नहीं…

.

इश्क है

जताता भी हूँ पर…

जाँचना तुझे आता नहीं ..

बताना है तुझे

कितनी चाहत है  मगर…

बताना मुझे आता नहीं…

.

मेरी जानिब तू भी

बेकरार तो है

इकरार कर…

इजहार मेरा दिखता है तो

तोड़कर दीवार,

इश्क का दीदार कर

इसरार ही में

ना बीते बाकी

खुद पर अब तो ऐतबार कर….

महामूर्ख, मूर्ख और समझदार…

महामूर्ख, मूर्ख और समझदार…

मुख्यतः 3 तरह के लोग हैं दुनियाँ में, महामूर्ख, मूर्ख और समझदार!!!
वे जो देखकर, सुनकर या किसी अन्य से जानकर पहले वस्तुओं / लोगों  को अच्छे या बुरे में वर्गीकृत करते हैं … फिर अच्छों में केवल अच्छाइयां और शेष में केवल कमियाँ ही देखते हैं! वे महामूर्ख की उपाधि योग्य हैं!
दूसरे प्रकार के लोग नई वस्तुओं / लोगों / नवाचारों को डरते-डरते जैसे तैसे आजमाने तैयार होते हैं, पहले केवल खामियां देखते , गिनते, गिनाते हैं फिर नकार देते हैं, फिर कभी कहीं से पुनरानुरोध पर स्वीकार लें तो उसकी खामियाँ याट करने, स्वीकारने, और शेष पर विचार से ही इंकार करते हैं!!! ये मूर्ख कहवाने योग्य होते हैं!
तीसरे वे हैं जो उपलब्ध वस्तुओं / लोगों / नवाचारों को स्वीकार से पूर्व सभी के गुण-दोषों का तुलनात्मक अध्ययन करते / कराते हैं फिर परिवेशानुसार न्यूनतम दोष एवं अधिकतम उपयोगिता वालों का चुनाव करते हैं! वे जानते हैं कि संसार में दोषमुक्त कुछ नहीं है! न्यूनतम दोषयुक्त ही सर्वोत्तम है! और सर्वदा-सर्वोत्कृष्ट कुछ नहीं रह सकता… जो आज सर्वोत्तम / सर्वश्रेष्ठ स्थापित है कल या आज भी दूसरे परिवेष में उसका स्थान कुछ / कोई अन्य अधिक उपयेक्त होगा!!! ये ही समझदार कहलाने योग्य हैं!

मधुर मिलन….. 

 – मधुर मिलन ….. 

मकसद को ढूंढ़ते….
या मकसद के पीछे भागते लोग

अकसर याद नहीं रख पाते …
अपनों को ..
अपनों की जरूरतों को …
अपनी भूख को …
प्यास को ….
अपने आप को…
मगर कहां मुमकिन …
कितना मुमकिन …
कब तक …
कितनी देर तक….
दूर रह सकेगा कोई …
अपने आप से ..
अपने भीतर के उस आईने से
मिलने से कैसे बचेगा  …
जो खोल देता है …
अपनी छाया  और अपने आप के बीच  ….
आने वाले सारे पर्दे

सारी पर्तें

एक के बाद एक

हटती चली जाती हैं

फिर मिलना ही होता ह …

सामना करना ही होता है …

शून्य से … बुलबुलों से छीने अनंत प्रश्नों का …

सब उघड़ता चला  जाता है…

एक-एक कर सारे सारे पर्दे टूट जाते हैं

चिलमन तार तार हो जाते हैं…

तब …

हाँ केवल तभी

हो पाता है …

स्वयं से …

अपने आपसे …

मधुयामिनी सा

मधुर मिलन…..

सत्यार्चन

जीवन सफल?

प्रिय मित्र;
हरि ॐ!
मेरे प्रश्नों के उत्तर मिल पायें … शुभकामनायें !!
1 – आपको…. क्या पाना अब भी शेष है?
2 –  क्यों पाना है?

3- क्या आपको उस प्राप्ति से क्या जीवन की सार्थकता का अनुभव मिलेगा?

4 – क्या इन्हीं प्राप्तियों के लिये आपको यह जीवन अवसर के रूप में प्राप्त हुआ है…?
5 – आप जितने सक्षम हैं क्या उतने सफल हैं?
6 – वास्तव में कितने सक्षम हैं आप?
7 – आपकी सारी सफलतायें मिलकर आपको कितनी प्रसन्नता
दे चुकी हैं? / दे रही हैं?? / देती रहेंगी ???
8 – क्या जीवन की सफलता, सफलताओं में ही है???
#सत्यार्चन #SathyArchan

लटकी हुई शर्त — Prahlad Chandra Das

गंगाराम, गंगाराम ! नंगाराम, नंगाराम !! दुबला-पतला सींक सा लड़का गंगाराम और पीछे चिढ़ाती हुई उद्दंड लड़कों की टोली – गगाराम,गंगाराम ! नंगाराम, नंगाराम !! …… अच्छे-खासे नाम की ऐसी-की-तैसी कर दी थी बदमाशों ने! गगाराम इक्के-दुक्के के साथ विरोध करता, कभी-कभार लड़ भी जाता, लेकिन, जब लड़कों की पूरी टोली ही उसके पीछे […]

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LIFE RULE. — chandanspdblog

✍1. *जीवन* जब तुम पैदा हुए थे तो तुम रोए थे जबकि पूरी दुनिया ने जश्न मनाया था। अपना जीवन ऐसे जियो कि तुम्हारी मौत पर पूरी दुनिया रोए और तुम जश्न मनाओ। ✍2. *कठिनाइयों* जब तक आप अपनी समस्याओं एंव कठिनाइयों की वजह दूसरों को मानते है, तब तक आप अपनी समस्याओं एंव कठिनाइयों […]

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आत्मविश्वास का महत्व — हिंदीमेंनिबंध

आत्मविश्वास पर निबंध (1) जैसा आपका आत्मविश्वास होगा वैसा ही आपकी क्षमता भी होगी । (2) चाहे आप छोटी या बड़ी जगह से हों, आपकी सफलता आपके आत्मविश्वास और दृढ़ता से निर्धारित होती है। (3) आत्मविश्वास बात-चीत में बुद्धि से अधिक सहायक होता है। (4) आत्मविश्वास है तो आप शुरू करने से पहले ही जीत […]

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आयुर्वेद एक चमत्कार Magic of Ayurveda —

आयुर्वेद एक चमत्कार Magic of Ayurveda आयुर्वेद = आयुः + वेद अर्थात् आयु और वेद, इन दो शब्दों के योग से आयुर्वेद शब्द बना है जिसका अर्थ है जीवन विज्ञान। आयुर्वेद विश्व की प्राचीनतम चिकित्सा पद्धतियों में से एक है। आयुर्वेद का तत्व ज्ञान पंचमहाभूतों यानि आकाश, वायु, अग्नि, जल और पृथ्वी इन पाँचों के […]

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कैसे कोई जी पाये…

कैसे कोई जी पाये

मरने की जिद कब कोई करे,
जीने की वजह पर मिले नहीं
चाहत जीने की मर जाये,
जीना मुश्किल जब हो जाये,
फिर कैसे कोई जी पाये….!
.
जीने के बहाने जिये बहुत,
बेगाने, अपने किये बहुत,
घावों को अपने ढंक-ढंक कर
औरों के घाव भी सिये बहुत….
अपना ही नासूर जब बन जाये,
खुद ही बह, जाहिर हो जाये,
मुस्कान दिखाये ना दिख पाये

कैसे कोई दर्द छुपा पाये

तब जीना मुश्किल हो जाये
फिर कैसे कोई जी पाये…

#सत्यार्चन