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श्रेणी: भारत

भारतीय हैं तो ॑भारत॑ हैं

भारत लेखन हिन्दुस्तानी हिन्दी

अनुभव 

बीते कल व आने वाले कल में आज के स्वयं का 10% से अधिक  वैचारिक व्यय करने वाला, जीवन में बड़ी सफलताओं से दूर ही रहता है! 

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मेरा देश बदल रहा है? 

मेरा देश बदल रहा है?  विगत वर्षों में, सोशल मीडिया पर अर्धसत्य युक्त अफवाहों से हंगामा फैलाकर, दुनियाँ के 6 बड़े देशों में युगों से सत्ता पाने  को संघर्षरत कट्टरपंथी ताकतों ने सत्तासीन होने में सफलता  पा ली!   कुछ देशों के नव सत्ताधीश,  सत्तासीन होने के बाद भी इस अर्धसत्य आधारित अफवाह तंत्र रूपी शस्त्र […]

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सुख चाहिये? ये लीजिए! – 10 (असफलता के 10 सूत्र)

कुछ भी करने से पहले योजना बनाने में कुछ समय अवश्य खर्च किया जाये और योजनानुसार ही उसपर अमल किया जाये तो जीवन सफल नहीं तो असफल करने के लिये किसी विशेष प्रयास की आवश्यकता नहीं होती बस आपको ज़रा सा लापरवाह भर होना होगा! 

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आइये अफवाहें फैलायें••• (अ)धर्म निभायें!

अब यह तो हम पर ही है कि हम आँख मूँदकर मनगढ़ंत अफवाहों को अग्रेषित कर देश में उथल-पुथल मचाने में सहयोगी हों! या आँख खोलकर अग्रेषम से पहले पुष्टि कर लें! …आपके सहयोग से फैलाई गई  अफवाह  से  यदि  किसी  निर्दोष  की  हत्या  भीड़  द्वारा कर दी जाती है तो भीड़ से अधिक बड़े हत्यारे आप हैं! दुनियाँ की अदालत भले आपको सजा दे पाये या ना दे पाये… किन्तु “उसकी अदालत”  सजा देने में ना पक्षपात करती है ना जरा सा भी रहम !

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निष्फल-सत्संग!

निष्फल-सत्संग!  अपनी प्रेक्षण क्षमता व उपलब्ध साधनों की सहायता से एक बार अपने आसपास, परिचितों, समाज,  देश में,  स्वयं ही देखकर निम्न का आंकलन कीजिए- 1- प्रतिष्ठित भजन /कैरल्स / सूफी के गायक। 2- प्रतिष्ठित ‘भक्ति-काव्य’ गायन मंडली के प्रमुख। 3- प्रतिष्ठित प्रवचन-कर्त्ता! 4- प्रतिष्ठित पुजारी / पादरी /मौलाना! 5- प्रतिष्ठित उपदेशक••• आदि! ध्यान दीजिएगा […]

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कर्ज चुकायें-पुण्य कमायें! 

*कर्ज चुकायें-पुण्य कमायें!* जिसकी गोद में खेलकर बड़े हुए, जिससे सब कुछ अधिकार पूर्वक लेते रहे, उसकी तरफ भी, कुछ तो जवाबदेही बनती है ना हमारी…! *प्रकृति / कुदरत से, बस कर्ज लिये जा रहे हैं… इस कर्ज को   उतारने की क्यों नहीं सोचते?* क्या नहीं लेते हैं हम प्रकृति से…? और जो भी लेते हैं […]

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दोगले 

:- दोगले -:  शाम का अंधेरा घिर रहा था, पंछियों के साथ- साथ थके माँदे मेहनती लोग भी घर लौट रहे थे, शहर की बिजली  जो ईमानदारी की तरह कभी भी गायब होते रहती थी। इस समय भी गायब ही थी, गया ईमान कब लौटे •••• लौटे या ना भी लौटे••• कौन जाने! मैं भी […]

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वर्तमान आरक्षण व्यवस्था सरकारी मोटराइज्ड व्हीलचेयर है!

वर्तमान आरक्षण व्यवस्था में; चलने में कमजोर आरक्षितों को मोटराइज्ड व्हीलचेयर पर बिठाकर नैसर्गिक सक्षम लोगों के साथ चलाने, बढ़ाने, दौड़ाने जैसा मूर्खता पूर्ण व आभासी प्रयास किया जा रहा है!

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सुख चाहिये? ये लीजिये!-7- सत चिंतन…

सुख चाहिये? ये लीजिये!-7- सत चिंतन… ईश्वर को समझना है तो आत्मा को समझें … बिल्कुल राष्ट्र को समझने के लिये नागरिक को समझना की तरह … किसी भी राष्ट्र की इकाई उसके नागरिक हैं … इसीलिये मैं कहता हूँ “मैं भारत हूँ” किन्तु केवल मैं ही भारत नहीं हूँ वरन् मैं भी भारत हूँ […]

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सुख चाहिये? ये लीजिये- 6 (जीवन में सुख के रंग)

सुख चाहिये? ये लीजिये- 6 (जीवन में सुख के रंग) सभी रंगों की अपनी-अपनी महत्ता है यही महत्ता याद दिलाने प्रतिवर्ष होलिकोत्सव आता है! 💓 जानवरों के जीवन में तो दो ही रंग होते हैं, श्वेत व श्याम किंतु मानव जीवन अनेक  शुभ-अशुभ रंगों से मिलकर ही सजता है! शुभ रंगों की समग्र, सम्पूर्ण चाह हर एक को है… […]

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