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लेखन हिन्दुस्तानी

Fearful GOD!

Fearful GOD ! People don’t beleave in being God near them ! Beacuse they think themselves eligble for being blessed with HIS/Her Blessings! However if they believe Being GOD’s Presence in their surroundings, They expect they have to do nothing, if HE / SHE is closure to them , HE/ SHE has to show HIS/HER […]

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लेखन हिन्दुस्तानी हिन्दी

सर दर्द!

नया अस्पताल, नयी जाँचें, नया तरीका, नया खर्च ….  

शायद एकाध महीने भर्ती ही रहना पड़ जाये….

भारत लेखन हिन्दुस्तानी हिन्दी

बदतर को तत्पर रहें फिर जीभर जियें !

उसके घटित हुए बिना ही, बार-बार उसके घटने की पीड़ा से,

उसके वास्तव में घटने तक तो बचे रह ही सकते हैं!

लेखन हिन्दुस्तानी

ईमान खतरे में है —

जहाँ में है रोशन सियासत नफरतों की, सुलतान का अब ईमान खतरे में है! अमन की फ़िजा में साँसों का ख्वाहिश मंद, दुनियाँ का एक-एक इंसान खतरे में है!!

लेखन हिन्दुस्तानी

नया विचार नई परम्परा!

दोस्तो, क्या आपको पता है कि “शादी विवाह, गृहप्रवेश, जन्मोत्सव आदि के समय उपहार लेकर जाने की परम्परा के पीछे कौनसा उद्देश्य छुपा है ?” “उद्देश्य है कि ” हर एक व्यक्ति ऐसे अवसर अपनी सामर्थ्य की सीमा तक जाकर अपनी सारी पूंजी खर्च चुका होता है, ऐसे में उस अपने की,  उसका आत्मसम्मान आहत […]

लेखन हिन्दुस्तानी

दबी साँस !

स्रोत: दबी साँस !

लेखन हिन्दुस्तानी

बनायें, निभायें या तोड़ें  परम्परायें !

बनायें, निभायें या तोड़ें  परम्परायें ! 28 मई 2017 10:43  • कोई भी परंपरा दुनियाँ बनने के साथ-साथ तो नहीं ही बनी होगी!  • उन्मुक्त, उच्छृंखल और अनवरत स्वच्छंद विचरते से थककर कभी किसी ने कोई कार्य, कोई ऐसा संजीदा आचरण किया होगा, जिसे दूसरों ने अपनाकर खुशी पाई होगी!  • ऐसे ही किसी का […]

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मैंने गाँधी को नहीं उस मुखौटे को मारा

मैंने गाँधी को नहीं उस मुखौटे को मारा     मैंने गाँधी को नहीं मुखौटे को मारा

भारत लेखन हिन्दुस्तानी हिन्दी

आया सतयुग! जाता कलयुग …

आया सतयुग! जाता कलयुग … शायद बाबा जय गुरुदेव जी से भी पहले से मैं कहते आ रहा हूँ, कि सतयुग आ रहा है…. किन्तु अब तो आ भी चुका है! पूर्ण सत्यनिष्ठ व्यक्तियों का सतयुग प्रवेश हो चुका है किन्तु आसुरी शक्तियों की समाप्ति अभी शेष है… असत, आडंबर, अव्यवहारिक आचरण करने वाले मनुष्य […]

लेखन हिन्दुस्तानी

हम, हिन्द-हिन्दी-हिन्दू-हित हिमायती हम!

हम, हिन्द-हिन्दी-हिन्दू-हित हिमायती हम! भारतीय प्रधानमंत्री जी के अत्यधिक साहसिक कदमों से ‘भारत’ होने पर गौरवान्वित अनुभव हुआ! – किन्तु महत्वपूर्ण सामयिक, सार्वजनिक घोषणाओं की अधिकृत / विसतृत जानकारी , संबंधित शासकीय संस्थानों में, देश के विभिन्न गैर हिंदी भाषी प्रदेशों में अनिवार्यतः त्रिभाषीय (अंग्रेजी , हिन्दी और स्थानीय भाषा में भी) उपलब्ध कराये जाते हैं! यथा केरल […]

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