Menu
हिन्दी

मुरझाया फूल

मुरझाया फूल दिल में आया फूल मुस्कुराया! दिल में समाया फूल मुरझाया!! सच कहूँ तो फूल नहीं जीता तुम्हारी तरह आस में निराश में वो नहीं सुनता है कब कौन क्या कहता है जो हो रहा होता बस वही समझता है! डाली पर होता है तो भरपूर खिलता है टूटकर बिछड़ता है तो चंद ही […]

Advertisements

हिन्दी

आज सूखा पत्ता हूँ! 

आज सूखा पत्ता हूँ! हरा था तो पोषक था  आज सूखा पत्ता हूँ!  जानता हूँ हरे पत्तों के बीच  आज नहीं जँचता हूँ!  दोष तुम्हारा नहीं  है प्रकृति का नियम!  कोई साख नहीं संजोती कभी किसी सूखे पत्ते को! जानते हो क्या मगर कि उड़ाये ना जायें अगर••• तेज हवा झंझावात में   सूखे पत्ते तब […]

हिन्दी

सुख चाहिये ये लीजिए -10- बुद्ध-सुबुद्ध 

स्वर्णिम मॊके का फायदा उठाने से बेहतर है, हर मॊके को स्वर्ण में बदल डालना!

हिन्दी

सत्य मेव जयते! -1

सत्य मेव जयते! -1 जीवन यात्रा में, नैतिकता की परिधि के भीतर का, हर मनोरम दॄश्य, उचित व  रमणीय है, किस दॄश्य पर कितना रमना है यही, विराम को, उचित और अनुचित बनाता है!  संतुलित है तो सब उचित और असंतुलित है तो कुछ भी उचित नहीं !  सबसे महत्वपूर्ण संतुलन या सामजस्य ही है! […]

भारत लेखन हिन्दुस्तानी हिन्दी

चिर तरुण सागर जी महाराज 

चिर तरुण सागर जी महाराज   मेरी, मुझसे और जग से पहचान कराने के वास्तविक अधिकारी परम पूज्य मुनि श्रेष्ठ श्री श्री तरुण  सागर जी महाराज को श्रद्धांजलि!   आदरांजलि!  उनके चिर तरुण हो सकल ब्रम्हाण्ड में व्याप्त होने पर समझ नहीं पा रहा हूँ कि शोक करूँ?  क्यों करूँ?  वे अनंत थे!  अमर हैं!  अमर […]

भारत लेखन हिन्दुस्तानी हिन्दी

कट्टर नौ दिन उदार सौ दिन! 

हम हमारी धार्मिक नियमावलियों के अनुपालन में इतने सजग हैं कि भले धर्म रहे ना रहे नियम जरूर साधे रखना है!

हिन्दी

जंगली आगाज 

जंगली आगाज ————————– सूखे पत्तों का हश्र युगों से एक जैसा ही हुआ होगा। कल्पवृक्ष में भी कभी पतझड़ तो हुआ होगा! * जड़ों से जोर आजमा कर पौधा, पेड़ कैसे बन सकता है? लाशें बिछाकर मिला सिंहासन अलाव सा तपा हुआ होगा! * वृक्ष हो तो बटवृक्ष सा मूल-तने में भेद ना हो देखकर […]

हिन्दी

अपने, अपनापन और रिश्ते

💤💤 अपने, अपनापन और रिश्ते 💤💤        एक बार किसी से अपनापन जाग गया••• कोई अपनों में शामिल हो गया तो••• *वो तो अपन ही हो गया!* *कोई अपने आप सा होकर आपमें समाहित लगने लगे तभी सच्चे अर्थों में वह आपका अपना है!*     फिर अपने आप से रूठकर कोई दूर कैसे हो सकता है? अपने […]

भारत लेखन हिन्दुस्तानी हिन्दी

दिल की सुन•••

दिल की सुन•••  नर्म सिरहाने पे सर , हाथ दिल पर रखकर,  सुन धड़कनों की सदा, बस झुठलाना छोड़ दे, तस्वीर दिल में बसी है, देख ले और चूम ले, आ तोड़ दायरे सारे, अब शरमाना छोड़ दे, ऐ दोस्त; जी ले कुछ पल, मर-मर कर जीना छोड़ दे, भरोसा कर अपने, मनवा की पुकार […]

%d bloggers like this: