कचरा प्रबंधन कर, गमलों में बनायें, जैविक खाद

कचरा प्रबंधन कर, गमलों में बनायें, जैविक खाद

यदि आप भी बागवानी को स्वस्थ रहने का साधन मानते हैं और बागवानी के कचरे का प्रबंधन कर जैविक खाद बनाना चाहते हैं तो वीडियो देखिये

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Sun Light

2 Time Zones and day light saving in India

2 Time Zones and day light saving in India

Indian Govt are intended on considering 2 Time Zones in India, in light of Day Light Saving!
I Think we, India, have to STOP copying other’s and start moving as Leader in innovating IDEAS ! Specially in the issue of 2 Time Zone!
Being an awaked Indian, I have a different view in favour of INDIA.
We are India, a majority of Hindus’ who generally are aware of Local Time of each n every place or at least District in India, through Hindu Callender or Kundali App for the same. Then why we are intended on ONLY 2 Time Zones?

IST should be continued as a uniform Time, and we should adopt Local Light Saving Time (Day Light Saving Time),  in fraction of 5 or 10 Minutes as per Local Sun-rise and Sun-set.


People might feel it difficult in beginning but if we are going to be Digital and if we are moving to be Global, we have to prepare ourselves to face these constrained . Because who are already working with foreign clients are already used to with
different time Zones.  Similarly 2 Time Zone would also be difficult in beginning. If Day Light is main motto we would save double comparing to 2 Time Zone Local Light Saving Time for offices only , shopkeepers already adopted as per Sun rise and set times.

Notes – Generally I write in Hindi,  as I did previously with many precious issues. But I heard on fewer times by a very little number of responsible persons. Several times some extraordinarily greater issues also remained unheard ! Though I lover of National  language – Hindi, but in national interests itself,  now I am started also writing in that foreign language, which only may considered to hear by responsible persons in INDIA.

#SathyaArchan / Satyarchan / Sathyarchan

(# – A Global name @ web searches)

मेरा हृदय, घर है तुम्हारा

मेरा हृदय, घर है तुम्हारा

 

 

मेरे हृदय का एक कक्ष …
आरक्षित रहा जो  तुम्हारे नाम…
ना भर सका तुम्हारे सानिध्य से ….
ना ही रिक्त तुम्हारी यादों से….,

 

तुम हो अब ‘स्थित वहाँ ‘

 

यहाँ मगर मेरे दिल में भी हो

और रहोगी भी सदा ….

तुम्हारी अमिट यादों  में….!!!

बढ़ती कारें ...

सत्यांकन बाइ सत्यार्चन- 1

सत्यांकन बाइ सत्यार्चन – 1

#GST लागू होने का सबसे बड़ा लाभ किसी और को नहीं बल्कि मुझे हुआहै.

मुद्दत से तमन्ना थी जहाँ में जाना चाहूँ या जहाँ-जहाँ मुझे जाना पड़े,  मेरा घर मेरे साथ चले….

अब बड़ी कार 🚗 और छोटे मकान 🏠

लगभग एक ही कीमत पर मिलेंगे!

… तो लोगों को अपनी लाइफ-स्टाइल, थोड़ी प्रोग्रेसिव कर

मकान 🏠 की जगह कार 🚗 में ,

चलता फिरता, बहु-उपयोगी , रोमांचक घर 🏠

बसाने पर सोचना शुरु कर देना चाहिए! (मेरा तो सपना ही यही है….) विश्व-स्तरीय  कंपनियों की बड़ी-बड़ी कारें 10 लाख तक घटी कीमतों में मिलने लगी हैं… अब स्वदेशी विदेशी सब पर एक जैसा टैक्स …

तो हमारे देश की ‘घटिया’ निर्माता कंपनियाँ के ‘घटिया सामानों’ से भी कम कीमत में

विश्व प्रसिद्ध कंपनियों के, या पतंजलि के शानदार उत्पाद

 जनता को सममूल्य पर मिलने लगेंगे!

*जनता को तो देश-भक्ति के प्रदर्शन में… देशी ही खरीदने चाहिए!*

*हमारी बात और है!*

 *सत्यांकन बाइ सत्यार्चन* -1

गुमनाम हैं कई…

गुमनाम हैं कई…

 #जय_हो!

भारत भूमि प्रारंभ से ही विचारकों की उर्बरा शक्ति से युक्त है….  देश में अनेक विलक्षण प्रतिभा संपन्न व्यक्ति आज भी निवासरत  हैं. किन्तु उनकी विलक्षण प्रतिभा को मान नहीं मिल पाता काऱण वे बुद्धिलब्ध तो हैं … किन्तु प्रपंच रचना में पीछे हैं… कुछ को मैं जानता हूँ…

उनमें से एक व्यक्ति जो –
– #GIVEITUP का 2012 से सूत्रधार है,
– 1988 से स्वच्छता अभियान का निवेदक है,

 -2009 से  “Use Social Media Cleanly” का भी प्रवर्तक है।
– 1990 से भ्रष्टाचार उन्मूलन का तैयार फार्मुला केन्द्र सरकार को देने प्रयासरत है
(क्योंकि भ्रष्टान्मूलन केवल ऊपर से नीचे को ही सम्भव है)!
– गरीबी उन्मूलन में गरीबों की अनिवार्य सहभागिता की विचारधारा का जनक है,
– राष्ट्र रूपी इमारत के गठन में नागरिक को ईंटों की तरह देखता/दिखाता है,
– व्यक्ति/विचारधारा/जाति/धर्म के स्थान पर विचार के अनुसरण को वरीयता का सन्देश देता है,
– जागरूकता को नागरिक की प्रथम आवश्यकता का नारा दे रहा है!
वह एक “रास्ता चलता” आम आदमी है …. हमारे वर्तमान प्रधान मंत्री जी ने कनाडा अभिभाषण में उसे इसी नाम से ॉ समबोधित किया था …. गिव इठ अप के प्रवर्तक के रूप में …. इसीलिये वह “रास्ता चलता ” “आम आदमी” है
और तब तक रहेगा भी जब तक
राष्ट्रीय नेताओं, पत्रकारों, प्रतिष्ठितो में
दूसरे के विचारों को बिना मूल्य चुकता किये
यानी चुराकर उपयोग ना करने की
गैरत ना आ जायेगी!
आशा है विचारवान व्यक्ति
अपने अनुभवों के साथ मेरे वक्तव्य पर मुखर होंगे!
#हरि_ओम् !!!
#सत्यार्चन (SathyaArchan /SathyArchan /SatyArchan /
SathyaAnkan /SathyaAlert /SatyAlert)
(वेव पर वैश्विक)

कहीं “काल” ना बन जाये बरसात … आइये प्रार्थना करें…

कहीं “काल” ना बन जाये बरसात … आइये प्रार्थना करें…

(सबका सहयोग कर स्वयं के सहयोगी बनें!!!)

मित्रो; बरसात जरूरी है, आ भी गई है,

बरसात की अमृतमयी फुहारें अपने साथ चैन लेकर आती है… कृषि का यानी हमारे भोजन का साधन बन जाती हैं. लेकिन जब यही फुहारें धाराओं में बदल जाती हैं तो तूफान ले आती हैं… तब यही बरसात अमृत से आपदा  बन जाती है.

आस नहीं होती निराश

पसलियों के पिंजरे में …. धड़कता है जैसे दिल …. पत्थरों के बीच खुश हैं हम …. कभी तो पत्थरों पर भी… हरियाली छा ही जायेगी …

(सबके सहयोगी बन स्वयं का सहयोग करें!!!)

कई प्राकृतिक आपदाओं की आशंका के पूर्व

हमने सामूहिक प्रार्थनाओं का बड़ा असर देखा है… आप चाहे हिंदू, मुस्लिम, सिख, ईसाई, जैन, बौद्ध, पारसी, या किसी भी धर्म के मानने वाले हों , प्रार्थना तो हर एक धर्म का हिस्सा है… और यह अपील करने वाला मैं आप के ही धर्म को मानने वाला हूँ‍‍…. .

आपको .यह भी विश्वास दिलाता हूँ कि ऐसी प्रार्थना हमारे मुख्यमंत्री जी व प्रधानमंत्री जी भी, यज्ञादि अनुष्ठान कराकर तक, वर्षों से करते आ रहे हैं,  यदि प्रजा मन वचन व कर्म से राजकीय हित में अपने बादशाद, सम्राट, राजा या प्रधान के साथ हो तो कोई राज्य कभी असफल हो ही नहीं सकता.  (सामूहिक प्रार्थना के कुछ पूर्व परिणामों  के  प्रमाण इस निवेदन के अंतिम भाग में,  आपके संतोष के लिये दिये गये हैं ताकि आप पूरे मन से प्रार्थना कर सकें!)

(सबका सहयोग कर स्वयं के सहयोगी बनें!!!)

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(सबके सहयोगी बन स्वयं का सहयोग करें!!!)

इस बरसात के आगमन से पहले से मैं और मेरे परिजन,  मित्रगण और निकटजन पहसे से ही

अपने प्रदेश के लिये .यह प्रार्थना  करते आ रहे हैं कि

हे  सर्वोपरि (/ ‘…..’)  हम तेरे कदमों में विनीत रह,  तुझसे यह प्रार्थना (…/ इल्तिजा/ प्रेयर….) करते हैं कि हे  सर्वोपरि (/ ‘…’)  इस साल भारत में ऐसी बरसात हो कि कृषि को अमृत तो मिल जाये मगर किसी की जान पर ना बन आये …. किसी की जान ना जाये … हमारे मध्यप्रदेश सहित  सम्पूर्ण भारतवर्ष में, तू गुनहगारों पर रहम कर, उनको,  उनके किये की ऐसी भयानक सजा से मुक्त कर…  उनपर और और उनके आश्रित  निर्दोषों पर रहम कर….  ऐ सबके मालिक!  कुछ ऐसा करम कर कि … भूखों को भरपूर भोजन का साधन भी हो जाये और किसी निरीह की जान भी ना जाये…!”

(सबका सहयोग कर स्वयं के सहयोगी बनें!!!)

 आप सबसे निवेदन है कि,  जब,  जितना हो सके,  ऐसी प्रार्थना करते रहें … अभी तो बरसात शुरु ही हुई है … मध्य प्रदेश के बाहर, पहले ही, बरसात से,  कुछ जानें जा चुकी हैं ….  आगे; कम से कम जनहानि हो ! इसीलिए हम सब, अपने-अपने सर्वोपरि से,  ऐसी प्रार्थना करें और इस बरसात के बाद,  परिणामों की समीक्षा करें,  ताकि हम,  उस दयालु से, आगे और कई तरह की, खुशहाली के लिये भी, सच्चे मन से,  प्रार्थना  कर खुशहाली के दूत बने रह सकें.

पूर्वानुभव

बात सन 2011-12 के दि

सम्बर-जनवरी की है , मैं;  नया-नया स्थानांतरित होकर शहडोल पहुँचा था. परिवार अभी शिफ्ट हुआ नहीं था. … तो समय काटने एक विश्वप्रसिद्ध लेखक की प्रार्थना पर लिखी किताब पढ़ रहा था … उस लेखक के अनेक अनुभव उसके आराध्य की प्रार्थना के चमत्कारी परिणामों के रूप में उस पुस्तक में  लिखे थे … उस लेखक का उसके आराध्य के प्रति समर्पण से भरा,  गहरे विश्वास के साथ,  अनुरोध था कि हमें कुछ भी पाने के लिये उसके सुझाये आराध्य की आराधना व प्रार्थना करना चाहिये … मेरे मस्तिष्क में उसकी सीख घर कर गई …. किन्तु केवल प्रार्थना करने की आधी बात,  यानी उसके आराध्य के स्थान पर  अपने आराध्य की प्रार्थना करने की !

(सबके सहयोगी बन स्वयं का सहयोग करें!!!)

एक दिन कार्यालयीन समय समाप्ति के बाद, घर जाने से पहले,  सहकर्मियों ने मौसम को देखते हुए,  ओलावृष्टि व उससे फसलों को होने वाले नुकसान  की आशंका जताई…,  मेरे मन में उस लेखक की आधी युक्ति घूम गई …. मैंने सहकर्मियों से विश्वस्त स्वर में कहा,  ओले नहीं गिरेंगे मगर आप को मेरा सहयोग करना पड़ेगा….!  रोज के मिलने वाले थे तो जरा में मान गये …! मेरे ही टेबल के आसपास बैठकर,  हम 3-4 लोगों ने अपने-अपने आराध्य से, हमारे बैठने की जगह से 15-15 किलोमीटर तक के क्षेत्र को,  ओलों से सुरक्षित रखने की प्रार्थना की….  आश्चर्य ! उसने मान लिया.

 2013 में 25-25 किलोमीटर, 2014 (भोपाल)  में 50-50 किलोमीटर के पुनः प्रार्थना की ‘उसने’ सुनी!  2015 में  भोपाल में भी, डी बी माल में 3 धर्मों के लोगों ने मेरे साथ बैठकर फिर से समूचे भोपाल व भोपाल के सीमावर्ती जिलों के लिये कृषि क्षेत्र को सुरक्षा देते हुए केवल शहरी क्षेत्र में  ही ओले बरसाने की प्रार्थना की… …… इन्हीं ओलों के लिये 2016 में समूचे मध्य प्रदेश को सुरक्षित करने की प्रार्थना की … सीमांत जिलों को छोड़कर उसने सुनी!  आप जानकारी जुटायेंगे तो आश्चर्यचकित रह जायेंगे कि हर बार हमारी सामूहिक प्रार्थना उस कृपालु द्वारा, लगभग  100%  सुनी गई… !  साथ ही अन्य अनेक अवसरों पर मित्रों , परिचितों के संकट काल में,  उनके साथ साथ-साथ,  मैं अपने मेरे मित्रों सहित ऐसी दया की याचना,   प्रार्थना कर उसके आश्चर्यजनक परिणाम देखते आ रहा हूँ… ! आप भी कीजिये!

मजहब मेरा-तेरा

(सबका सहयोग कर स्वयं के सहयोगी बनें!!!)

 

भारत के शीर्ष 10 – प्रधानमंत्री

भारत के शीर्ष 10 – प्रधानमंत्री  

मोदी जी से पहले भारत के जो प्रधान मंत्री हुए हैं … उनपर हम सबका अलग-अलग अभिमत होगा किंतु बहुमत और सुमत को मिलाकर अब तक के टाप 10 का अब का निष्कर्ष यह हैं …

मोदी जी को इस आँकलन में पूरी तरह सम्मिलित नहीं किया गया है। शेष को वह स्थान क्यों दिया जाना चाहिये इसके संक्षिप्त कारक भी नाम के साथ ही दिये गये हैं …  किसी विशिष्ट राजनैलिक विचारधारा से जुड़े या निष्पक्ष लोगों को भी आपत्ति हो सकती है तो वे अपनी आपत्ति या अपना अभिमत संभ्रांत शब्दों में कारक सहित लिखें … उचित अभिमत के आधार पर सूची पुनरीक्षण निरंतर जारी रहेगा ! यहाँ दिये 5 क्रम भी आभासी हैं अंतिम नहीं ….

आप चाहें तो विकीपीडिया से पुनर्स्मरण हेतु संदर्भ देख सकते हैं….

1 –  जवाहर लाल नेहरू जी,

(अंग्रेजों ने भारत छोड़ने से पहले देश को आर्थिक, सामाजिक और सौहीर्द्र के क्षेत्र में नेस्तनाबूद ही कर दिया था इसके बाद भी राष्ट्रीय आत्म निर्भरता के लिये, जब देश की प्राथमिकता रोटी और कपड़ा ही थी तब भविष्य को भी साथ साथ विचारकर भाभा एटमिक सेंटर, टिहरी गढ़वाल, भाखरा नांगल जैसे बड़े बांध, सहित अनेक औद्योगिक इकाइयों का प्रारंभ,   17 वर्षों तक लगातार सर्वांगीण विकास के लिये समर्पित व सफल प्रयास .)

2 – राजीव गाँधी जी,

(विषाद में,  वेमन से विषम परिश्थितियों में कार्यग्रहण के बाद से हर समय राष्ट्र को 21वीं सदी में टाइम ट्रेवल कराने के प्रयास करते रहे. विवादास्पद व क्रांतिकारी कंप्यूटरीकरण इन्हीं के कार्यकाल की देन है,  प्रबल विरोध के बाद भी ‘आधार  कार्ड योजना (नंदन नीलकणि योजना)’ भी इन्हीं के कार्यकाल की देन हैं जो आधुनिक भारत के आधार बने हुए हैं)

 

3 – अटल बिहारी वाजपेयी जी

(विशिष्ठ व्यक्तित्व की विशिष्ठ कार्य पद्धति सिद्धांत पर चल देश की मई प्राथमिकताओं के चयन व उनको वरीयता के आधार पर ‘परमाणु शक्ति संपन्न होने के पथ पुनरागमन,  ‘स्कूल चलें हम’, ‘प्र. मं. सड़क’ जैसी यौजनाओं का क्रियान्वयन प्रारंभ‍‍….).

 

4 – नरेंद्र मोदी जी

(क्रांतिकारी निर्णय  की अभूतपूर्व क्षमता व दक्षता , अंतरराष्ट्रीय पटल पर भारत को सशक्त राष्ट्र के रूप में  स्थापित कराने में  अब तक के सर्वाधिक सफल राष्ट्राध्यक्ष! वर्तमान में कार्यरत ,

नोट – इनके द्वारा लागू कराई गई क्रांतिकारी योजनाओं के परिणाम आने पर ये इस सूची के शीर्ष पर भी हो सकते हैं और सूची से बाहर भी…)

5 – इंदिरा गाँधी जी,

(आपात्काल जैसा मनमाना निर्णय व आपरेशन ब्लू स्टार की जगह अन्य शांतिपूर्ण कूटनीतिक विकल्प अपनाये होते तो नेहरू जी, व राजीव गाँधी जी के साथ इस सूची में दूसरे  तीसरे स्थान पर होतीं. पूर्वी पाकिस्तान को बांगलादेश के रूप में उदित होने में  इन्हीं की अगुवाई में अंतरराष्ट्रीय समर्थन जुटाया गया जिसके परिणामस्वरूप हमारा शत्रुता रखने वाला, पड़ौसी देश, आधा ही शेष बचा. बैंकों का राष्ट्रीयकरण व सुदृढ़ केन्द्रीय बैंक व्यवस्था जो वैश्विक मंदी के दौर में देश को सुरक्षा देने में सक्षम रही. जिसे सारी दुनियाँ ने सराहा.)

 

 

6वें से 10 वें क्रम के लिये , बिना क्रम की प्रतीक्षा सूची  में संयुक्त रूप से इन सभी का है. नाम सम्मिलित है …

31 अगस्त तक सबके अभिमत आमंत्रित हैं उसके बाद ही क्रमांकित सूची जारी की जायेगी –

पी व्ही नरसिम्हाराव जी,

मोरारजी देसाई जी,

वी पी सिंह जी

मनमोहन सिंह जी

इंद्रकुमार गुजराल जी

चंद्रशेखर जी

चौधरी चरण सिंह जी,