सपने पालो तो सही … होंगे तभी तो … सच हो पायेंगे ना !

सपने पालो तो सही … होंगे तभी तो … सच हो पायेंगे ना !

 सपने… सच हो सकें…

दोस्तो,

बेशक

 सभी के

 सारे सपने

 कभी सच में नहीं बदल पाते

 मगर,

 उससे बड़ी सच्चाई है कि

 सपने

केवल उनके सच हो सके

जिन्होने पहले सपने देखे

फिर उन्हें पाला,

अपने सपनों से

 दीवानगी की हद तक मोहब्बत की,

अपने सपने को

अपना जुनून बना डाला …

जिनने अपने सपनों को जिया…..

और वो …..

जो सपने देखने तक से डरते हैं

 वो क्या जानें कि

सपनों के जीने भर में ही

कितना शुरूर है

और सच होने का जलसा 

कैसा अनौखा होता है….

                    (12 अगस्त 2013) – #सत्यार्चन

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अमृत का प्याला

– अमृत का प्याला –

 

 

बड़े जतन से…

बार-बार…

 बनाया

अमृत का प्याला

सजाया …

तुम तक लेकर आया

 देखकर

या

अनदेखे

अक्सर

तुमने ठुकराया !

 काश …

स्वीकारते तुम …

अमृत का प्याला!

#सत्यार्चन

व्यर्थ की आशायें

व्यर्थ की आशायें

 आज की भोर भी

रोज सी ही थी

सुनहरी किरणें बिछी थीं …

और तुम ना थे….

http://lekhanhindustani.com/2017/08/05/व्यर्थ-की-आशायें

 

मगर तुम तो

दिन,  शाम और रात में भी

होते ही कब हो….

बस

मैं ही होता हूँ

सदा की तरह

एकाकी

अ’मृत

व्यर्थ की आशाओं के साथ …

#सत्यार्चन

 

 

 

 

रामराज्य!

रामनीति – राजनीति ? राम जाने!

आज की राजनीति बहुत जटिल है जी … समझ ही नहींं आती
जैसे आदर्शतम रामराज्य में राजा राम भी नहीं समझ पाये थे
या शायद समझा नहीं पाये थे ….
किसी अकिंचन के सीता मां पर संदेह जताने से
उस राज्य के राजा द्वारा अपनी रानी को त्यागने की घटना  को
उच्चकोटि का आदर्श राजनैतिक आचरण  माना जाता रहा है …
इस अकिंचन सत्यार्चन को तो यह किसी भी राजघराने के रनिवास की मर्यादा का हनन् दिखता है…
मेरी बुद्धि भी उस अकिंचन जितनी छोटी है ना ….
जिसपर आरोप है कि आरोप उसने लगाया था ….
किन्तु क्या श्रीराम के महान रामराज्य में
किसी अकिंचन में इतना साहस था कि
वह महानतम राजा की रानी पर ऐसा घिनौना आरोप लगा सके….
कहीं ऐसा तो नहीं कि
सभासदों में से ही किसी ने किसी अज्ञात काल्पनिक अकिंचन का उल्लेख कर
अपनी बुद्धिजीविता-वश उपजे कुटिल प्रश्न को
उसके बहाने उठाया हो ….
जबकि प्रश्न स्वयं सभासदों का स्वयं का  ही रहा हो?
या
पति राम ने प्रश्न उठाने राजा राम का आवरण ओढ़ा हो  ….
या
व्यक्ति राम अपनी पत्नी की सुरक्षा में असमर्थ रहने की खीझ
अपनी उसी पत्नी को प्रताड़ित कर निकाल रहा हो …..
राम जाने ….!
मगर
हमारे राम जी ने जिस किसी भी कारण से जो भी किया
वह तत्कालीन परिस्थितियों में, सर्वोत्तम ही रहा होगा ….
क्योंकि श्रीराम का सम्पूर्ण आचरण इस योग्य है
कि उनके निर्णय पर संदेह मूर्खता ही होगी …
आलोचना अलग बात है …
पति राम का आलोचक मैं भी हूँ ….
क्योंकि पति-पत्नी संबंधों को मैं
आज के परिप्रेक्ष्य में ही देख पा रहा हूँ ….
तत्कालीन का तो केवल अनुमान ही कर सकता हूँ ना ….!!!
#सत्यार्चन / SatyArchan / SathyaArchan
(वेव पर वैश्विक नाम)

आइये भारत को समृद्ध करें !!!

आइये भारत को समृद्ध करें!!!

(नव-आकर्षक  योजनाओं  व अद्यतनों के साथ पुनर्निवेदित…)

  • मैं- एक भारतवासी, राष्ट्रवादी सुझाव युक्त हिंदी-लेखन के कारण, 2010 में, अंतर्राष्ट्रीय संस्था  “सिटीजन इंटीग्रेशन पीस सोसायटी इंटरनेशनल ” द्वारा “राष्ट्रीय रतन अवार्ड” हेतु नामाँकित हुआ.
    • मैं,  ट्विटर से जागरण जंक्शन तक सोशल मीडिया का नियमित उपयोगकर्ता, राष्ट्रवादी,  पाठक, विचारक, योजनाकार, जागरूकता का प्रचारक कार्यकर्ता व यथार्थवादी लेखक हूँ.
    • मेरी ही तरह,  भारत, हर भारतवासी का है , हर किसी के चिंतन में भारत का होना स्वाभाविक है.
    • इसीलिए आप कलम के जादूगरों में हों या  सिखाड़ी  …. आपके सीने की आग का यहाँ स्वागत है !
    •  हालाँकि; सभी अपने अपने तरीके से अपने ब्लॉग आदि पर देश के प्रति अपनी चिंता / अपने कर्त्तव्य का प्रदर्शन करते रहते हैं जिससे कई बार एक ही तरह के विचार लगभग एक जैसे शब्दों में कई अलग ब्लॉगों पर मिल जाते हैं.
    • विचारणीय तथ्य है कि  “किसी भी युद्ध में, पृथक-पृथक मोर्चों पर कुशलतम योद्धाओं को भी  एक-एक कर लड़ने भेजकर  केवल वीरगति ही दिलाई जा सकती है…. विजयश्री का वरण नहीं किया जा सकता!  विजय पाने कुशल / अकुशल योद्धाओं की टुकड़ी को, एक साथ एक के बाद एक मोर्चे पर संगठित आक्रमण कर ही जीता जा सकता है”

    http://wp.me/p4TEDf-p

    स्थापित और गुमनाम कलमकारों को आह्वान ….
    (चित्र – गूगल से साभार…)

  • विचार करें ….  आपको हमको सब हिन्दी जनों को सोचना है… तय हमें करना है कि हम अलग-अलग प्रयासों को मरता देखना चाहते हैं…,  जिसमें किसी को किसी लक्ष्य की प्राप्ति नहीं होनी है …., या एक दूसरे का हाथ पकड़ साथ चलकर,  हिन्दी को और हिन्दुस्तानी भाषाओं को सशक्त करने में योगदान करना है!
  • साहित्य समृद्ध हुआ तो राष्ट्र समृद्ध होगा ! यदि कर्तव्य निर्वहन का श्रीगणेश करना है तो …. अनुरोध है कि,  देश हित में https://lekhanhindustani.com/ को  भी ‘आपका अपना’ ‘लेखन-मंच’  मानें और संकल्प ले सहयोग करें  …… अपनी कलम के जादू या अनाड़ीपन पर विचार किये बिना,  आपकी अपनी शैली में,  भाषायी सेवा के लिए, आपकी सर्वोत्तम (नई या पुरानी) ब्लॉग-पोस्ट को इस निवेदन के टिप्पणी / प्रतिक्रिया खण्ड में चिपकायें, ( या उसका संक्षिप्त विवरण सहित शीर्ष लिंक यहां चिपकायें !)  या सीधे यहाँ ही प्रतिक्रिया के रूप में लिखें !
  •  सभी उद्गार आपके ब्लॉग पते के उल्लेख सहित प्रकाशित होंगे ! 
  • 1 सितम्बर 2017 से “लेखन हिन्दुस्तानी” (वर्डप्रेस बिज़नेस ब्लॉग में बदलकर) समूह ब्लॉग होने जा रहा है… तब सभी उपयुक्त प्रेषक रचनाकारों को लेखन हिन्दुस्तानी के लेखक वर्ग में भी सम्मिलित कर लिया जायेगा!
  • प्रेषित में से सर्वश्रेष्ठ रचनाकार को मासिक, त्रैमासिक व वार्षिक सम्मान-निधि एवं सम्मान-पत्र से सम्मानित किया जायेगा!  (विस्तृत विवरण केवल प्रेषक के मेल पर भेजा जायेगा!)  इससे हमारे माध्यम से आपको बिना कुछ भी खोये , निःशुल्क प्रकाशन व प्रोमोशन सहित प्रतिष्ठा लाभ भी  प्राप्त होगा !!! 
  • आपके सुझाव, शिकायत, पोस्ट व प्रतिक्रिया लिखने;  टिप्पणी,  रिएक्शन या प्रतिक्रिया  विकल्प का प्रयोग कीजिये !
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  •  शुरुआत कीजिये आज ही ! अभी! प्रतीक्षा रहेगी….

कचरा प्रबंधन कर, गमलों में बनायें, जैविक खाद

कचरा प्रबंधन कर, गमलों में बनायें, जैविक खाद

यदि आप भी बागवानी को स्वस्थ रहने का साधन मानते हैं और बागवानी के कचरे का प्रबंधन कर जैविक खाद बनाना चाहते हैं तो वीडियो देखिये

Sun Light

2 Time Zones and day light saving in India

2 Time Zones and day light saving in India

Indian Govt are intended on considering 2 Time Zones in India, in light of Day Light Saving!
I Think we, India, have to STOP copying other’s and start moving as Leader in innovating IDEAS ! Specially in the issue of 2 Time Zone!
Being an awaked Indian, I have a different view in favour of INDIA.
We are India, a majority of Hindus’ who generally are aware of Local Time of each n every place or at least District in India, through Hindu Callender or Kundali App for the same. Then why we are intended on ONLY 2 Time Zones?

IST should be continued as a uniform Time, and we should adopt Local Light Saving Time (Day Light Saving Time),  in fraction of 5 or 10 Minutes as per Local Sun-rise and Sun-set.


People might feel it difficult in beginning but if we are going to be Digital and if we are moving to be Global, we have to prepare ourselves to face these constrained . Because who are already working with foreign clients are already used to with
different time Zones.  Similarly 2 Time Zone would also be difficult in beginning. If Day Light is main motto we would save double comparing to 2 Time Zone Local Light Saving Time for offices only , shopkeepers already adopted as per Sun rise and set times.

Notes – Generally I write in Hindi,  as I did previously with many precious issues. But I heard on fewer times by a very little number of responsible persons. Several times some extraordinarily greater issues also remained unheard ! Though I lover of National  language – Hindi, but in national interests itself,  now I am started also writing in that foreign language, which only may considered to hear by responsible persons in INDIA.

#SathyaArchan / Satyarchan / Sathyarchan

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