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सुख चाहिये? ये लीजिए! -9

सुख चाहिये? ये लीजिए! -9  *हम अपने स्वयं के  सबसे अच्छे मित्र और सबसे बड़े शत्रु होते हैं क्योंकि हमको हमसे ज्यादा कोई और नहीं जानता ना ही जान सकता और केवल हम ही हममें कोई परिवर्तन कर सकते हैं••• कोई दूसरा नहीं! * -हम अपने आपके बिषय में अकसर अनेक उद्घोष करते रहते हैं! जैसे- मुझसे […]

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भारत लेखन हिन्दुस्तानी हिन्दी

दोगले 

:- दोगले -:  शाम का अंधेरा घिर रहा था, पंछियों के साथ- साथ थके माँदे मेहनती लोग भी घर लौट रहे थे, शहर की बिजली  जो ईमानदारी की तरह कभी भी गायब होते रहती थी। इस समय भी गायब ही थी, गया ईमान कब लौटे •••• लौटे या ना भी लौटे••• कौन जाने! मैं भी […]

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तत्व दर्शन! 

<तत्व दर्शन!>

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आइये ब्लाॅगर… स्वागत है आपका!

आइये ब्लाॅगर… स्वागत है आपका! पूर्व घोषणा अनुसार आपका अपना ब्लाॅग “लेखन हिन्दुस्तानी” बिजनेस ब्लाॅग में परिवर्तित होकर अब समूह ब्लाॅग हो गया है! “लेखन हिंदुस्तानी” को आप; अपनी रचनाओं से सुसज्जित, आपके निजी ब्लाॅग के नि:शुल्क विज्ञापन हेतु उपयोग कर सकते हैं! आपका स्वागत है- (1) आपकी सर्वोत्तम रचना के साथ आपकी ब्लाॅग लिंक्स […]

भारत लेखन हिन्दुस्तानी हिन्दी

वर्तमान आरक्षण व्यवस्था सरकारी मोटराइज्ड व्हीलचेयर है!

वर्तमान आरक्षण व्यवस्था में; चलने में कमजोर आरक्षितों को मोटराइज्ड व्हीलचेयर पर बिठाकर नैसर्गिक सक्षम लोगों के साथ चलाने, बढ़ाने, दौड़ाने जैसा मूर्खता पूर्ण व आभासी प्रयास किया जा रहा है!

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सुख चाहिये? ये लीजिये! – 8

बनावटी युग में जीते हुये हम बनावटी होते गये! सच तो यह है कि जिन छोटी छोटी चीजों में / बातों में हम खुश हो सकते हैं उनमें सम्मिलित होना ही हम ओछापन /स्तरहीनता मानने लगे ! अगर इसे समझना है तो यूँ करें कि अपने आसपास के लोगों के दिखावटीपन और शर्मसार होने के […]

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सुख चाहिये? ये लीजिये!-7- सत चिंतन…

सुख चाहिये? ये लीजिये!-7- सत चिंतन… ईश्वर को समझना है तो आत्मा को समझें … बिल्कुल राष्ट्र को समझने के लिये नागरिक को समझना की तरह … किसी भी राष्ट्र की इकाई उसके नागरिक हैं … इसीलिये मैं कहता हूँ “मैं भारत हूँ” किन्तु केवल मैं ही भारत नहीं हूँ वरन् मैं भी भारत हूँ […]

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सुख चाहिये? ये लीजिये- 6 (जीवन में सुख के रंग)

सुख चाहिये? ये लीजिये- 6 (जीवन में सुख के रंग) सभी रंगों की अपनी-अपनी महत्ता है यही महत्ता याद दिलाने प्रतिवर्ष होलिकोत्सव आता है! 💓 जानवरों के जीवन में तो दो ही रंग होते हैं, श्वेत व श्याम किंतु मानव जीवन अनेक  शुभ-अशुभ रंगों से मिलकर ही सजता है! शुभ रंगों की समग्र, सम्पूर्ण चाह हर एक को है… […]

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नजर •••

नजर ••• ये जो नजर है तेरी कहर है हम पर उठती है झुकती है••• तीर सी चुभती है••• मचलता है वर्षों दिल ••• सुलगता रहता है जिस्म!

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नियुक्त, नियुक्ति, नियोक्ता

नियुक्त, नियुक्ति, नियोक्ता नियुक्ति… #नियोक्ता_का_उपकार_नहीं #विवशता_है! और #नियुक्त_का_अधिकार_है_वेतन… • नियुक्त से प्राप्त #उत्पादकता के बराबर का #मूल्य_कोई_भी_नियोक्ता_नहीं_चुकाता… #ना_ही_चुका_सकता… • नियुक्त की उत्पादकता से नियोक्ता को हुई प्राप्तियों का #बहुत_छोटा_सा_अंश_ही_मानदेय_रूपी_वेतन होता है … • नियुक्त का कर्तव्य #नियोक्ता_का_हित_संरक्षण और नियोक्ता का #उचित_व_समय_पर_मानदेय / वेतन ! • कार्य के उपस्कर जुटाना, नियोक्ता का और उनके उपयोग से […]

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