“अत्याचार धर्म”

एक नया धर्म “अत्याचार धर्म” जन्मा है

जिसके प्रवर्तक, प्रचारक, संचालक और समर्थक

सब स्व-परिभाषित स्वयंभू जमाती / धर्मरक्षक / सुसंदेशक आदि

कहलाना चाहते हैं

किन्तु

वे केवल मानवता की हत्या

के घोर निकृष्ठ कर्म के अतिरिक्त

शेष कुछ भी नहीं कर पाते….!!!

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अवयस्क अपराध नियंत्रक

अवयस्क अपराध नियंत्रक कानून में परिवर्तन पर केन्द्र सरकार को बधाई! धन्यवाद! साधुवाद!
वयस्क/ अवयस्क की ओर से यौनशोषण जौसे छद्म-आरोप पर भी विचार निवेदित !!!

श्रद्धांजली!!!

सकारात्मक व्यंचिकर (व्यंग चित्रकथा रचियता) प्राण कुमार शर्मा जी के दिव्यालीन होने का समाचार मिला…

श्रद्धांजली!!!

ज़िद है जिद

ज़िद है जिद.

ज़िद है जिद

   जिद है जिद…..

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दोस्तो:

हम हिन्दी हमारी संस्कृति के प्रति इतने कृतघ्न हो चुके हैं

कि हम हमारे  संस्कारों के उपहास में

स्वयं भी ना केवल सम्मिलित ही हैं

वरन अपने ही उपहास पर

अट्टहास किए जा रहे हैं!!!!!!

.

वे जो षणयंत्रकारियों के चंगुल में

असहायता-वश जा फँसे हैं या अविवेक-वश

उन्हें भी हाथ बढ़ाकर वापस खींचने का दायित्व

आप-हम संस्कारी भारतीयों का ही है!

पहला कदम बढ़ाने से पहले

आवश्यक है कि ‘हम-सब’

जागृत-जन एक साथ

हाथों में हाथ लेकर

कदम से कदम मिलाकर

साथ-साथ बढ़ें!!!

.

इसीलिए आव्हाहन और अनुरोध है

हर उस  सच्चे ‘हिन्दी-जन’ से

जिसे अपने हिन्दी होने पर गौरव हो!

जो अपने समस्त व्यतिगत, जातिगत, सामाजिक, राजनैतिक, क्षेत्रगत, अनुरागों से

राग-द्वेषों से  निष्पृह रह

हिन्दी के प्रति अपने दायित्व की प्रतिपूर्ति में

जो बन पड़े कर सके!

यथा-

जो लेखन में हैं

अपनी दृष्टि में अपनी सर्वोत्तम रचना भेजें,

या आपको किसी अन्य की कोई रचना प्रशंसनीय और पठनीय लगी हो

उसके ‘कापी राइट उल्लंघन’ से सुरक्षित रहते हुए

उसके संपादक / प्रकाशक आदि के उल्लेख के साथ हमें भेजें!

हिंदी लेखन से जुड़े अनेक ऐसे विशिष्ठ विचारक भी हैं

जिन्हें उचित अवसर, मंच या प्रायोजक मिलने शेष हैं

वे अपनी कृतियाँ हमें टिप्पणी या ई-मेल कर भेजें!

समस्त स्थापित / अस्थापित ब्लाँग लेखन से संबद्ध जन

 अपनी श्रेष्ठतम कृति के साथ (केवल लिंक अस्वीकार्य कृति आवश्यक रूप से संलग्न हो) अपने

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जि़द़ है…. हिंदी, हिंद, हिंदु हित की अब ज़िद़ है….