पर उपदेश…

पर उपदेश…

“पर उपदेश कुशल बहुतेरे ….
जे आचरहिं ते नर ना घनेरे
– (गोस्वामी तुलसीदास जी)” ने कहा है …
इस चौपाई में वर्णित में से केवल दो तीन
 तथाकथित धर्मगुरु जेल  जा सके हैं
शेष स्वच्छंद कार्यरत हैं…
उन्होंने धर्माडम्बर को ही विलासिता पूर्ण जीने का व्यवसाय बना रखा है…!
आम जन भी धर्माचरण से अधिक धर्माडम्बर,
और उनके पक्षधरों के पीछे चलने में विश्वास रखते हैं !
अधिकांश आमजन, वास्तविक धर्म से अपरिचित रह,
 स्वयं धर्माडम्बर में स्वयं को नष्ट-भ्रषट करने में लगे हैं…
 सभी धर्मों का एकरूप,
संक्षेप में धर्माचरण जनना चाहें तो बस इतना है कि
“कभी किसी प्राणी को
अपरिहार्य हुए बिना
शारीरिक या मानसिक
कोई भी कष्ट देने का कारण मत बनो ! “
यही सन्मार्ग है !
में लिखित शब्द अक्षरशः सत्य हैं!
मैं भी मानता हूँ कि सामाजिक जीवन में रहते हुए,
सन्मार्ग का अनुसरण बहुत कठिन है….
किन्तु क्या हम लोग केवल सरल मार्ग पर चलने को ही
जीवन की सफलता मान प्रसन्न हो सकते हैं?
मैंने कठिनाइयों से सामना कर सन्मार्ग पर बने रहने का दृढ़ निश्चय किया
थोड़े ही समय जूझने के बाद,
हर कठिन सहज होता गया!
अब कठिनतम के स्वागत को सदैव तत्पर हूँ !
#सत्यार्चन

महामूर्ख, मूर्ख और समझदार…

महामूर्ख, मूर्ख और समझदार…

मुख्यतः 3 तरह के लोग हैं दुनियाँ में, महामूर्ख, मूर्ख और समझदार!!!
वे जो देखकर, सुनकर या किसी अन्य से जानकर पहले वस्तुओं / लोगों  को अच्छे या बुरे में वर्गीकृत करते हैं … फिर अच्छों में केवल अच्छाइयां और शेष में केवल कमियाँ ही देखते हैं! वे महामूर्ख की उपाधि योग्य हैं!
दूसरे प्रकार के लोग नई वस्तुओं / लोगों / नवाचारों को डरते-डरते जैसे तैसे आजमाने तैयार होते हैं, पहले केवल खामियां देखते , गिनते, गिनाते हैं फिर नकार देते हैं, फिर कभी कहीं से पुनरानुरोध पर स्वीकार लें तो उसकी खामियाँ याट करने, स्वीकारने, और शेष पर विचार से ही इंकार करते हैं!!! ये मूर्ख कहवाने योग्य होते हैं!
तीसरे वे हैं जो उपलब्ध वस्तुओं / लोगों / नवाचारों को स्वीकार से पूर्व सभी के गुण-दोषों का तुलनात्मक अध्ययन करते / कराते हैं फिर परिवेशानुसार न्यूनतम दोष एवं अधिकतम उपयोगिता वालों का चुनाव करते हैं! वे जानते हैं कि संसार में दोषमुक्त कुछ नहीं है! न्यूनतम दोषयुक्त ही सर्वोत्तम है! और सर्वदा-सर्वोत्कृष्ट कुछ नहीं रह सकता… जो आज सर्वोत्तम / सर्वश्रेष्ठ स्थापित है कल या आज भी दूसरे परिवेष में उसका स्थान कुछ / कोई अन्य अधिक उपयेक्त होगा!!! ये ही समझदार कहलाने योग्य हैं!