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अशांत मन !

अशांत मन! (पुनर्लिखित एक पुरानी रचना ) शांति की खोज में भटकता रहा में यहाँ वहाँ… जाने कहाँ-कहाँ… गांव-गांव, नगर-नगर बस्ती -बस्ती , डगर-डगर! वन -उपवन-मधुवन हर कहीं कोलाहल हर ओर कृन्दन! उद्वेलित करते जटिल प्रश्न अब भी ना था हुआ शमन ! आखिर में अशांत मन जा पहुँचा ‘शांतिवन’ ज्वालायें थीं चिताओं में निष्तब्धता […]

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जागो सोने वालो!

जागो सोने वालो! मैं सूर्य!तस्वीर में खजूर के दरख़्त मुझसे बहुत बड़े दिख रहे हैं! तो क्या मैं उनसे छोटा हो गया ? वे तो अर्ध चेतन हैं—- जड़ सामान— और तुम? सुप्त चेतन! जागो समय व्यतीत होता जा रहा है••• फिर पछताओगे की मैं जगाने आता रहा और तुम जड़ खजूर की तरह अकड़ […]

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Dare???

Dare??? What’s seen (or hidden from eyes of some ordend followers of several political parties) is Real n bitter Truth of India… An Honest approach may transform it to Royal n Pleasant India! Im started in 1988 ! If someone may dare following Honesty is welcomed joining my shoulders equivalently! -Subuddh SatyaArchan

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पशु मनुष्य! 

पशु मनुष्य!  वास्तव में तो मनुष्य निकृष्टतम पशु है! कोई भी पशु प्रकृति के अनुरूप जीवनचर्या से नहीं भागता! मूर्ख  मनुष्य प्रकृति को ही वश में करना चाहता है!  कोई पशु अपने जीवन यापन भोजन आदि की पूर्ति के लिए सजातीय पर निर्भर नहीं रहता ! वह अपनी आवश्यकता की पूर्ति स्वतः ही करता है! […]

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दर्पण- मीडिया! 

दर्पण- मीडिया!   दर्पण निरपेक्ष है! दर्पण के पेट नहीं है, वह भूख प्यास से परे है! दर्पण लालच से परे है! दर्पण अपने और अपनों के  दर्द से ना व्याकुल होता है ना ही इसके डर से आतंकित!   इसीलिए दर्पण निष्पक्ष है! मीडिया की आदर्श भूमिका दर्पण सी होने की अपेक्षा अनुचित नहीं है किन्तु […]

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महान! 

महान!  ​यूँ मुसलमान हो जा  कि तू कुरान हो जा ! सच्चा हिन्दू हो जा तू इन्सान हो जा! पक्का इसाई हो जा मरियम का मान हो जा ! इतना महान हो जा कि तू आसमान हो जा! -सुबुद्ध सत्यार्चन 

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नवरात्रि 

नवरात्रि शुभ हो आपको व सबको! *हमारे कथन पर सीधे विश्वास या अविश्वास से पहले कथ्य को जाँच लें फिर निर्णय करें!* -सुबुद्ध सत्यार्चन *Don’t just Trust or DisTrust my words; Test then follow or forget!* -SathyaArchan शुभ की कामना है तो सदाचरण अपनायें! हमारा मौन व्रत रहेगा! *अतः यदि* *आपके/आपके निकटजनों के* *मन में/ जीवन […]

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अंत्येष्टि!

अंत्येष्टि! यदि आपके अपने ही आपके सर्वश्रेष्ठ प्रतिद्वन्दी हों और जीत गलाकाट प्रतिष्ठा का प्रश्न; तो समझ लीजिए बारूद की दीवारों वाला महल आपका परिवेष है… भटकती चिंगारी आपका भाग्य… और किसी भी पल आपके महल का आपकी चिता बनना ही आपकी परिणति! -सुबुद्ध सत्यार्चन If your greatest opponents are your dear ones…. then you […]

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मैं , तुम , हम!

मैं , तुम , हम! शीशों का छिटकना••• टूटना! बिखरना! किरचों का चुभना! बस तुम्हारे साथ ही होता है क्या? मेरा हाल क्या है ? कुछ पता भी है ? . तुम कहो मैं जीता ! मैं कहूँ तुम! जीत क्यों? हार क्यों? पनप सका ना अब तक वो प्यार क्यों? गले लगा लेते जब […]

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सुबोध 20180924

      ~~~आज का सुबोध~~~                 *समाधान*                        *संसार की हर समस्या के स्थायी समाधान की केवल 5 आवश्यकतायें हैं जिनमें हर समस्या का समाधान निहित है!* 1- समस्या की पहचान करना! 2- संबंधित पक्षों व कारणों की पहचान करना! 3- समस्या से संबंधित पक्षों में समाधान की आकांक्षा जगाना! 4- कारणों को सुधारना […]

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